Insurance Rules: अक्सर बीमा खरीदते समय ग्राहकों को ऐसी पॉलिसी थमा दी जाती है जिसकी उन्हें जरूरत ही नहीं होती. इसे बीमा की दुनिया में मिससेलिंग कहा जाता है. लंबे समय से ग्राहकों की शिकायत रही है कि एजेंट अपने फायदे के लिए उन्हें गलत प्रोडक्ट बेच देते हैं. अब बीमा नियामक इरडा ने इस बड़ी समस्या को जड़ से खत्म करने का मन बना लिया है.

IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में इस पूरे मामले पर खुलकर बात की है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि मिससेलिंग की सबसे बड़ी वजह एजेंटों को मिलने वाला भारी भरकम कमीशन है. जब शुरुआत में ही 40 से 50 प्रतिशत तक का कमीशन मिल जाता है, तो एजेंटों का ध्यान सही प्रोडक्ट बेचने से ज्यादा सिर्फ अपनी सेल पूरी करने पर होता है. नियामक अब एक नया कंसल्टेशन पेपर लेकर आया है जिसका मकसद पॉलिसीधारकों को फायदा पहुंचाना है.
कमीशन कम होने से ग्राहकों को होगा फायदा
अजय सेठ ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों का खर्च कम होने पर इसका सीधा लाभ ग्राहकों को मिलना चाहिए. नया प्लान लागू होने के बाद लाइफ इंश्योरेंस में ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिलेगा. वहीं जनरल इंश्योरेंस में क्लेम रेशियो में सुधार देखने को मिलेगा. कंपनियों की लागत कम होने से बीमा की प्रीमियम राशि कम होगी या कम से कम इसमें होने वाली बढ़ोतरी पर रोक लगेगी. नए नियमों के तहत पहले साल का कमीशन घटाया जाएगा. इसकी जगह जब ग्राहक अपनी पॉलिसी को रिन्यू कराएगा, तब एजेंट को बाकी का कमीशन दिया जाएगा. इससे एजेंट पॉलिसी बेचने के बाद भी ग्राहक से जुड़ा रहेगा.
गलत पॉलिसी बेचने वालों का बनेगा रिकॉर्ड
मिससेलिंग रोकने के लिए सिर्फ कमीशन घटाना ही काफी नहीं है. IRDAI एक पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री तैयार करने जा रहा है. इसमें उन डिस्ट्रीब्यूटर्स या एजेंटों का पूरा रिकॉर्ड होगा जो गलत तरीके से पॉलिसी बेचते हैं. अभी तक ग्राहक सिर्फ अपनी केवाईसी कराते हैं. नए नियम लागू होने के बाद ग्राहकों को अपने एजेंट या सप्लायर का भी पूरा इतिहास जानने का मौका मिलेगा. अगर किसी एजेंट के खिलाफ बहुत ज्यादा शिकायतें हैं, तो लोग उससे पॉलिसी लेने से पहले ही सावधान हो जाएंगे.
लोन के साथ बीमा थोपने पर लगेगी रोक
बाजार में एक बड़ी समस्या जबरन बंडलिंग की है. कई बार जब आप बैंक से लोन लेते हैं, तो आपको उसके साथ जबरदस्ती एक जीवन बीमा पॉलिसी चिपका दी जाती है. अजय सेठ ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि लेंडर अपने बचाव के लिए जीवन बीमा की मांग कर सकता है, लेकिन वो उस प्रीमियम से कमीशन कमाने की उम्मीद नहीं कर सकता. अगर कोई पैकेज दिया जा रहा है, तो उसमें उधार लेने वाले का भी साफ फायदा दिखना चाहिए.
डार्क पैटर्न पर कसेगा शिकंजा
बीमा सेक्टर में डार्क पैटर्न का भी खूब इस्तेमाल हो रहा है. जब कोई ग्राहक ऑनलाइन सिर्फ प्रीमियम का रेट जानना चाहता है, तो उसे अपना मोबाइल नंबर देने के लिए मजबूर किया जाता है. इसके बाद उसके पास लगातार प्रमोशनल कॉल आने लगते हैं. IRDAI चेयरमैन ने कहा कि बीमा एक मासमार्केट प्रोडक्ट है. इसके रेट को निजी जानकारी के पर्दे के पीछे नहीं छिपाया जा सकता. जब कीमत साफ नहीं होती है, तो ग्राहकों का ही नुकसान होता है. कोई भी कंपनी ग्राहक को वो चीज खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकती जो वो नहीं चाहता.
अजय सेठ ने एक बेहद अहम बात पर जोर दिया है. उनका कहना है कि आज से सातआठ साल पहले बीमा इंडस्ट्री कम खर्च में भी बेहतर काम कर रही थी. पहले लाइफ इंश्योरेंस का खर्च 16.5 प्रतिशत तक आ गया था, जो अब वापस बढ़कर 20 प्रतिशत के पार चला गया है. इसी तरह जनरल इंश्योरेंस में भी खर्चे 25 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं. कंपनियों को दोबारा उसी बेहतर स्थिति में लौटना होगा. नियामक ने इन सभी बदलावों के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी कर दिया है. इसके बाद ड्राफ्ट रेगुलेशन आएंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि ये नए नियम 1 जनवरी 2027 या 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकते हैं.

