
जीशान कदीर/सीतापुर, अमृत विचार : चाय पर चर्चा से लेकर देश के उच्च सदन तक अपनी साख और धाक जमाने वाले जासमीर अंसारी एक बार फिर सूबे की सियासत में फलक पर चमके हैं। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने को लेकर पार्टी की मंशा पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को जोड़ने की है।
12 जनवरी 1968 को उप्र के सीतापुर जनपद स्थित लहरपुर कस्बे में जन्मे जासमीर अंसारी बताते हैं कि उनके कामकाज की शुरूआत चाय के होटल से हुई। चाय पर चर्चा के साथ राजनैतिक चुस्कियां भाने लगीं तो अभिभावक जुफर फारूकी ने उन्हें राजनैतिक परिक्षेत्र में आगे बढ़ाया।
इसी के बाद वे सीतापुर जनपद की लहरपुर विधानसभा सीट से वर्ष 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक बने। बसपा से ही पत्नी कैसर जहां सीतापुर सांसद रहीं। नगर पालिका परिषद लहरपुर में अध्यक्ष पद पर दो बार जासमीर अंसारी और एक बार पत्नी कैसर जहां ने प्रतिनिधित्व किया।
वर्ष 2019 में थामा समाजवादी पार्टी का दामन
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जासमीर अंसारी ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा। जुलाई 2022 में वो विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए। जुलाई 2024 में इन्हें विधान परिषद में ही पार्टी का उपनेता भी बनने का मौका मिला।
पूर्वांचल को साधने का प्रयास
जासमारी अंसारी पिछड़ा वर्ग से आते हैं। पूर्वांचल में मुस्लिमों की इस वर्ग की बड़ी आबादी निवास करती है। मऊ और गाजीपुर जनपदों के अलावा वाराणसी, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बहराइच आदि में भी इस आबादी की चुनाव में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। बताते हैं कि पिछड़ा वर्ग साधने के लिए ही जासमीर अंसारी पूर्वांचल में कई बार भेजे जा चुके हैं।



