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​मदन, महेश और निर्मला… कौन हैं राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के साथ शामिल ये 3 नए ट्रस्टी

अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी प्रकरण के बाद मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक स्तर पर बदलाव कर दिया गया है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने लीडरशिप में कई अहम बदलाव किए हैं. ट्रस्ट ने एक रिटायर्ड एयर मार्शल को अपना पहला चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर नियुक्त किया है और 3 नए लोगों को ट्रस्टी बनाया गया है.

ट्रस्ट की कल बुधवार को 2 बैठक हुई. बैठक के दौरान ट्रस्ट ने पूर्व सैन्य अफसर जितेंद्र मिश्रा को 3 साल के कार्यकाल के लिए अपना पहला CEO नियुक्त किया. ट्रस्ट के मौजूदा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी को पूर्णकालिक महासचिव के पद पर प्रमोट कर दिया गया जबकि दिल्ली के प्रतिष्ठित बिजनेसमैन महेश भागचंदका को नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है.

राम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट में यह रीस्ट्रक्चरिंग, मंदिर के कथित तौर पर चंदा चोरी मामले के तूल पकड़ने, विवाद के बीच पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के कुछ हफ्ते बाद हुई है. विवाद से घिरने के बाद ट्रस्ट ने बड़े स्तर पर बदलाव लाने का ऐलान किया. ऐसे में ट्रस्ट ने मंदिर की सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, फाइनेंस और रोजमर्रा के कामकाज को लेकर प्रोफेशनल मैनेजमेंट स्ट्रक्चर तैयार करने का फैसला लिया था.

जितेंद्र मिश्रा: वायुसेना, ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवी अफसर

ट्रस्ट ने अपमे पहले CEO के लिए जितेंद्र मिश्रा का चयन किया है. मिश्रा एक पूर्व फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट हैं. वह इसी साल 30 अप्रैल को वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंगइनचीफ के पद से रिटायर हुए थे. वे पिछले साल चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के सीनियर प्लानर्स में से एक थे और पाकिस्तान के साथ 4 दिन तक चले जारी जंग के दौरान असाधारण सेवा के लिए उन्हें मेडल से नवाजा भी गया था.

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा अपनी नई भूमिका में ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज की देखरेख करेंगे. उनकी नियुक्ति ट्रस्ट के कामकाज में बहुत बड़ा बदलाव है, क्योंकि कुछ ऑपरेशनल जिम्मेदारियां पूरी तरह से ट्रस्टीसंचालित सिस्टम से हटकर प्रोफेशनल मैनेजमेंट की ओर शिफ्ट की जा रही है. उन्हें मंदिर परिसर की सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स, भीड़ प्रबंधन और ट्रस्ट के करोड़ों के फाइनेंस की देखरेख का जिम्मा दिए जाने की उम्मीद है.

महेश भागचंदका: दिल्ली के बिजनेसमैन, VHP से नाता

M2K ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. उन्होंने गिरी की जगह ली है, जो ट्रस्ट के गठन के समय से ही इस पद पर थे. दिल्ली से जुड़े बिजनेसमैन भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन के प्रमुख भी हैं और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल से करीबी का नाता रहा है.

भागचंदका की नियुक्ति के बारे में पता चलने पर, VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस फैसले का स्वागत किया और उन्हें राम जन्मभूमि आंदोलन का “अग्रणी सिपाही” बताया. इनके पास अब ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी होगी. यह ट्रस्ट मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की देखरेख करता है और बड़े पैमाने पर मिलने वाले दान का हिसाब देखती है.

मदन मोहन पांडे: राम जन्मभूमि केस लड़ने वाले वकील

ट्रस्ट ने बतौर ट्रस्टी सदस्य उत्तर प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता मदन मोहन पांडे को भी शामिल किया है. अयोध्या के रहने वाले 74 साल के वरिष्ठ वकील पांडे ने राम जन्मभूमि मालिकाना हक विवाद में राम लला विराजमान और दिवंगत महंत रामचंद्र परमहंस दास के लिए अपना पक्ष रखा था.

मदन मोहन पांडे ने 1990 के दशक में वकालत से अपने करियर की शुरुआत की थी. साथ ही उन्होंने साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आने तक इस कानूनी लड़ाई में शामिल रहे.

निर्मला यादव: पूर्व प्रिंसिपल और पहली महिला ट्रस्टी

उत्तर प्रदेश के शिकोहाबाद के पीजी कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल और लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यकर्ता रहीं निर्मला यादव ट्रस्ट की तीसरी नई और एकमात्र महिला सदस्य हैं.

निर्मला यादव इस समय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की उपाध्यक्ष हैं. वह राम मंदिर की देखरेख और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार संस्था की पहली महिला सदस्य भी हैं.

राम मंदिर से जुड़े ट्रस्ट के नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर के दान में हेराफेरी के आरोप लगे थे. चंदा चोरी से जुड़ा मामला तब विवादों में आया जब 7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता की ओर से यह आरोप लगाया गया कि मंदिर में चढ़ावे के तौर पर आए 5 करोड़ रुपये से 7.5 करोड़ रुपये के बीच की रकम का गबन किया गया. मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को पहली विशेष जांच टीम का गठन किया.

SIT रिपोर्ट के बाज 25 जून को 8 नामजद आरोपियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई. यह FIR भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश जैसे अपराधों और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई. नामजद में शामिल सभी 8 आरोपियों को अगले दिन गिरफ्तार कर लिया गया. जांच के अनुसार, इन आरोपियों के घरों से करीब 80 लाख रुपये बरामद किए गए.

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