Maternity Leave: कामकाजी महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश नौकरी और परिवार के बीच संतुलन बनाने का महत्वपूर्ण अधिकार है। भारत में मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत पात्र महिला कर्मचारियों को बच्चे के जन्म के समय निर्धारित अवधि तक मातृत्व लाभ दिया जाता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या 6 महीने यानी 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव के दौरान महिला को पूरी सैलरी मिलती है। कानून के तहत पात्र महिला को मातृत्व लाभ उसके औसत दैनिक वेतन के आधार पर दिए जाने का प्रावधान है।

26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव का नियम
मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत पहले दो जीवित बच्चों के मामले में पात्र महिला को अधिकतम 26 हफ्ते यानी 182 दिन तक मातृत्व अवकाश मिल सकता है। इस अवधि का एक हिस्सा बच्चे के जन्म से पहले भी लिया जा सकता है। वहीं, दो से अधिक जीवित बच्चों की स्थिति में कानून में मातृत्व अवकाश की अलग अवधि निर्धारित है।
क्या छुट्टी के दौरान पूरी सैलरी मिलेगी
पात्र महिला कर्मचारी को मातृत्व लाभ कानून में निर्धारित औसत दैनिक वेतन के आधार पर दिया जाता है। इसी वजह से इसे पेड मैटरनिटी लीव कहा जाता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सरकारी और निजी क्षेत्र में सेवा शर्तें अलग हो सकती हैं। सरकारी कर्मचारियों पर संबंधित सरकारी सेवा नियम भी लागू हो सकते हैं।
मैटरनिटी बेनिफिट के लिए पात्रता
मातृत्व लाभ प्राप्त करने के लिए सामान्य तौर पर महिला कर्मचारी का बच्चे के जन्म की संभावित तारीख से पहले के 12 महीनों में कम से कम 80 दिन काम करना जरूरी होता है। हालांकि, पात्रता संबंधित प्रतिष्ठान और कर्मचारी पर लागू कानून और नियमों के अनुसार तय होती है।
नौकरी को लेकर क्या है सुरक्षा
मातृत्व लाभ कानून में महिला कर्मचारियों को नौकरी से संबंधित सुरक्षा भी दी गई है। केवल मातृत्व अवकाश लेने के कारण महिला को नौकरी से हटाने या उसके खिलाफ प्रतिकूल कार्रवाई करने पर कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। इसका उद्देश्य महिला को मातृत्व के दौरान आर्थिक और रोजगार संबंधी सुरक्षा देना है।
मेडिकल बोनस का भी प्रावधान
कानून में मेडिकल बोनस का भी प्रावधान है। यदि नियोक्ता महिला को मुफ्त प्रीनेटल और पोस्टनेटल देखभाल उपलब्ध नहीं कराता है, तो निर्धारित शर्तों के तहत पात्र महिला को मेडिकल बोनस मिल सकता है।



