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​चार राज्यों में दफ्तर, सीक्रेट चेंबर और ‘आधे कटे नोट’ का कोड… रायपुर में यूं चल रहा रोजाना 60 करोड़ का हवाला नेटवर्क

Raipur News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर हवाला का एक बड़ा हब बन चुकी है. दुर्ग पुलिस द्वारा भिलाई में 4 करोड़ रुपये की भारीभरकम नकदी जब्त किए जाने के बाद हवाला कारोबार के एक ऐसे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो देश के चार प्रमुख राज्यों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली से संचालित हो रहा है. खुलासे के अनुसार, रायपुर से हर दिन लगभग 60 करोड़ रुपये से अधिक का हवाला लेनदेन होता है. ट्रांसपोर्टेशन, सराफा, स्टील और खाद्यान्न व्यापार की आड़ में चलने वाले इस नेटवर्क में कोडवर्ड के रूप में ‘आधे कटे नोट’ और ‘सीरियल नंबर’ का इस्तेमाल किया जाता है. आइए जानते हैं कि यह करोड़ों का काला कारोबार आखिरकार कैसे संचालित हो रहा है.

​चार राज्यों में दफ्तर, सीक्रेट चेंबर और ‘आधे कटे नोट’ का कोड… रायपुर में यूं चल रहा रोजाना 60 करोड़ का हवाला नेटवर्क

दुर्ग पुलिस ने रायपुर के भनपुरी स्थित ‘गोल्डन मार्केट’ के जेड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के कार्यालय से निकली एक गाड़ी को रोका, जिससे 4 करोड़ नकद बरामद किए गए. इस ट्रांसपोर्ट कंपनी के दफ्तर रायपुर के अलावा नागपुर, मुंबई और गुजरात में फैले हैं. कंपनी के संचालक का दावा है कि यह राशि दिवाली बोनस/वितरण के लिए नागपुरमुंबई भेजी जा रही थी और उनके पास इसका वैध हिसाब है, लेकिन पुलिस ने विस्तृत जांच के लिए मामला आयकर विभाग को सौंप दिया है.

‘आधे कटे नोट’ और सीरियल नंबर से चलता है हवाले का खेल

हवाला कारोबारियों का काम करने का तरीका पूरी तरह कोडवर्ड और भरोसे पर टिका होता है. रकम के लेनदेन में 10, 20 या 50 के कटे हुए आधे नोट का इस्तेमाल होता है. जब भेजने वाला आधे नोट का टुकड़ा या नोट का सीरियल नंबर प्राप्तकर्ता को दिखाता है, तब जाकर दूसरे शहर में बैठी ‘अंगड़िया’ या हवाला एजेंसी उसे करोड़ों की नकदी सौंपती है.

एक लाख रुपये भेजने पर 1,500 से 2,000 तक का कमीशन वसूला जाता है. वहीं बड़े लेनदेन में 2 से 3 प्रतिशत तक का फिक्स कमीशन तय होता है. उदाहरण के लिए, झारखंड के लिए कमीशन 300700 रुपये, जबकि दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े सेंटरों के लिए यह 1,500 से 2,000 प्रति लाख है.

गुप्त चेंबर, सब्जियों और गुटखे की बोरियों में करोड़ों का ट्रांसपोर्टेशन

रकम को एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाने के लिए हाईटेक और बेहद सुरक्षित तरीके अपनाए जा रहे हैं. लग्जरी गाड़ियों और ट्रकों में चेसिस के नीचे या सीट के नीचे गुप्त चेंबर बनाए जाते हैं. पुलिस की नजरों से बचने के लिए करोड़ों के नोटों के बंडलों को आलू, प्याज, चने, तंबाकू और गुटखे के थैलों व बोरियों के बीच छुपाया जाता है. रायपुर शहर के भीतर लेनदेन के लिए मोपेड का इस्तेमाल गुटखे की बोरियों के साथ किया जाता है, जबकि अंतरराज्यीय सप्लाई के लिए बड़ी फोरव्हीलर्स का इस्तेमाल हो रहा है.

राजनीति से लेकर सराफा, स्टील और विदेश तक फैला नेटवर्क

सूत्रों के अनुसार, रायपुर में 55 से भी ज्यादा बड़े हवाला कारोबारी पूरी तरह सक्रिय हैं. रायपुर का तेलघाणी नाका हवाला कारोबार का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है. इसके अलावा फाफाडीह, गंज, भैंसथान, समता कॉलोनी, सदर बाजार, कपड़ा मार्केट, ट्रांसपोर्ट नगर खमतराई और कबीर नगर से नेटवर्क संचालित हो रहा है. रायपुर से निकलने वाला हवाला नेटवर्क न केवल दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक सीमित है, बल्कि वहां से इसके तार दुबई और लंदन तक जुड़े होने का दावा किया जा रहा है. राजनीतिक लेनदेन से लेकर सराफा, स्टील, आयरन, गुटखा, तंबाकू और खाद्यान्न व्यापार के अनऑफिशियल बिलिंग व ब्लैक मनी को ठिकाने लगाने के लिए हवाला का सहारा लिया जाता है.

पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं करोड़ों की खेप

रायपुर और आसपास के इलाकों में हवाला की जब्ती का यह पहला मामला नहीं है.

16 लाख रुपये : न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने ‘हंस ट्रेवल्स’ के दफ्तर में दबिश देकर बोरियों में भरे 20 रुपये के 400 बंडल और 10 रुपये के 80 बंडल जब्त कर आयकर विभाग को सौंपे थे.

6.60 करोड़ रुपये : कुम्हारी में पुलिस ने दो कारों से 500 रुपये के नोटों की शकल में 6.60 करोड़ जब्त किए थे. कार में सवार शक्ति सिंह, तेलघानी कुमार, ठाकुर महेश सिंह और वाघेला जुहेर भाई ने खुद को व्यापारी बताया था.

2.80 करोड़ रुपये : आमानाका इलाके में एक कार के सीक्रेट चेंबर से 2.80 करोड़ नकद बरामद किए गए थे, जो रायपुर के एक उद्योगपति व सराफा व्यापारी के बताए गए थे और नागपुर ले जाए जा रहे थे.

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