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​पॉल्यूशन, बदलता मौसम न बढ़ा दे परेशानी, अस्थमा और सीओपीडी वाले ये बातें रखें ध्यान

सर्दियां शुरू होने के साथ ही हवा में पॉल्यूशन बढ़ने लगता है. इस वजह से हर साल लोगों को कई हेल्थ प्रॉब्लम का सामना करना पड़ता है, जैसे आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, खराश, खांसी होना. जिन लोगों को पहले से ही रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम हैं उनमें समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है. बदलते मौसम में हवाएं ठंडी और शुष्क हो जाती हैं. ऐसे में सूजन, गले में सूखापन बढ़ता है. इस कारण सीओपीडी या अस्थमा ट्रिगर हो सकता है. जानिए इसके पेशेंट्स को कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए.

​पॉल्यूशन, बदलता मौसम न बढ़ा दे परेशानी, अस्थमा और सीओपीडी वाले ये बातें रखें ध्यान

जब मौसम में बदलाव हो रहा हो तो इस दौरान बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर इम्यूनिटी वालों और सांस से जुड़ी तकलीफों से गुजर रहे मरीजों का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है. जानिए कैसे पॉल्यूशन और मौसम में बदलाव सांस से जुड़ी बीमारियों को ट्रिगर करता है और आप कैसे इससे बचे रह सकते हैं.

COPD और अस्थमा में अंतर

क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों और श्वसन मार्ग से जुड़ी गंभीर बीमारी होती है. इसे क्रॉनिक डिजीज में गिना जाता है. इसके दो प्रकार होते हैं पहला क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, और दूसरा एम्फीसेमा. ये बीमारियां ज्यादातर धूम्रपान , हानिकारक गैसों के संपर्क में रहना और पॉल्यूशन के कारण होती हैं.

आमतौर पर सीओपीडी को बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता है. अस्थमा भी फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है, लेकिन सीधे तौर पर ये COPD के अंदर नहीं आता है. ये कम उम्र में शुरू हो जाता है, जिसमें ठंड, धूल, एलर्जी, के संपर्क में आने पर अटैक पड़ सकते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.

बदलता मौसम, पॉल्यूशन का असर

नवजीवन हॉस्पिटल के डायरेक्टर, डॉक्टर प्रवीन कुमार के मुताबिक, बदलते मौसम की हवाएं और पॉल्यूशन आपके फेफड़े में इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं. इस कारण से जो क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों में ट्रिगर की संभावनाएं बढ़ जाती है. पॉल्यूशन के द्वारा जो डस्ट और प्रदूषण के बारीक पार्टिकल्स होते हैं वो आपके सांसों के द्वारा सीधे फेफड़े में चले जाते हैं, इसलिए आपको इस दौरान थोड़ा ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत होती है.

ये सावधानियां बरतना है जरूरी

  • पॉल्यूशन बढ़ा हुआ हो, ठंडीशुष्क हवाएं चल रही हो तो सुबह और शाम के समय में सैर करने से बचें.
  • बाहर निकलते वक्त अच्छी क्वालिटी का मास्क जरूर लगाएं. इससे धूल, हवाओं के सीधे संपर्क और पॉल्यूशन के कणों से बचाव होगा.
  • अस्थमा या सीओपीडी है तो स्मॉग बढ़ने पर घर के दरवाजे और खिड़कियों को पीक टाइम में बंद रखना ही बेहतर होगा.
  • आप घर के अंदर एयर प्यूरीफायर और ह्यूमिडिटीफायर का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • धुएं से बचाव ऐसे में बहुत जरूरी है. सेकंड हैंड स्मोक, तेज मसालों की छौंक, अगरबत्ती, आग, गाड़ी चलने वाली जगहों से दूरी बनाएं.

लाइफस्टाइल में करें बदलाव

बदलते मौसम और पॉल्यूशन में सांस से जुड़ी से समस्याएं ट्रिगर न हो. इसके लिए जरूरी है कि आप खुद को हाइड्रेट रखें. चाहे तो दिन में एक या दो बार गुनगुना पानी पी सकते हैं. इसके अलावा स्टीम ले सकते हैं. इससे कफ को ढीला करने में मदद मिलती है. इसके अलावा बहुत ज्यादा सोडियम वाले फूड खाने से बचें. बाहर जाने की बजाय घर में ही हल्का व्यायाम करें और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने की आदत डालें.

डॉक्टर से लें सलाह

अगर आपको अस्थमा या फिर सीओपीडी जैसी कोई समस्या है तो एक बार अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए. इस दौरान इनहेलर या नियमित दवाओं की डोज में बदलाव की आवश्यकता हो सकती है. इसके अलावा अगर सांस फूलने, घरघराहट, छाती में जकड़न जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य सिर्फ सामान्य जानकारी प्रदान करना है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें और स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श करें.

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