Ram Mandir First CEO: श्री तीर्थ क्षेत्र परिसर में के पहले सीईओ के नाम का ऐलान जल्द हो सकता है। दरअसल सर्च कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी महाराज को सौंप दी है। जिसके आधार पर माना जा रहा है कि 2 सितंबर बुधवार को ट्रस्ट के पहले सीईओ के नाम की घोषणा होने हो सकती है। आपको बता दें बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और सर्च कमेटी के सदस्य ने मीडिया से मुलाकात की।

श्री राम जन्मभूमि परिसर में हुई बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देवगिरी ने बताया कि न्यास की ओर से प्रार्थना की गई थी तीन महानुभावों को हमारा मार्गदर्शन करें हम इतने बड़े विश्व प्रसिद्ध मंदिर का कुशल प्रबंधन करने के लिए एक उत्तम सीईओ की तलाश कर रहे हैं लेकिन हम खोज कैसे करेंगे इसलिए हमने प्रार्थना की जस्टिस कोहली से, चतुर्वेदी, हावड़े से इसे लेकर बात की गई।
आवेदन के बाद गूगल फॉर्म
इन तीनों ने मिलकर करीब 5585 आवेदन पत्रों के इंटरव्यू करके 30377 आवेदकों ने गूगल फॉर्म का जवाब दिया उसके बाद 1500 और उसके बाद 300 में से 16 लोगों का प्रत्यक्ष साक्षात्कार किया इनमें से जो निष्पत्ति मिली है वह आज सर्च कमेटी ने हमें सौंप दी है हम उनके आभारी हैं इसे हम एकत्र में बैठकर देखेंगे और न्यास मंडल में अंतिम निर्णय होगा. मेरी अपेक्षा है कि 2 सितंबर की बैठक में ट्रस्ट के सीईओ की नाम की घोषणा होनी चाहिए
सर्च कमेटी का नेतृत्व रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली ने किया
रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली ने कहा कि ट्रस्ट ने फैसला किया था कि सीईओ के चयन के लिए एक सर्च कमेटी बनाई जाए। जिसमें हमें यह काम करने के लिए चुना गया। इस काम में निष्पक्षता बहुत जरूरी है। ऐसे में 08 तारीख को हमें सर्च कमेटी के मेंबर के रूप में सूचना दी गई और 11 तारीख को हमनें पहले मीटिंग करके मानक तय किए। उसके बाद मंगाए गए एप्लीकेशन में से पात्र लोगों के नाम का चयन करने के लिए 18 तारीख तक 5585 एप्लीकेशन मिले। 19 अगस्त को मीटिंग में गूगल फॉर्म बनाया। जिसके लिए 3570 लोगों ने इस फॉर्म का जवाब दिया। उसमें ग्रेड ए, ग्रेड बी, ग्रेड सी बनाकर अंतिम तीन नाम का चयन किया गया। इसके बाद इसकी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई है।
तीन बड़े संतों का विकल्प
मिली जानकारी के मुताबिक, नियमित ट्रस्टी होने के कारण तीन दिग्गज संतों को समिति में पदेन सदस्य बनाया जा सकता है। इनमें शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ और युगपुरुष स्वामी परमानंद के नाम शामिल हैं।
यदि इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है तो समिति में इन संतों की सदस्यता को लेकर अलग से नाम तय करने की जरूरत नहीं होगी। पदेन सदस्य के तौर पर उनकी जिम्मेदारी उनके मौजूदा ट्रस्टी पद से जुड़ी हो सकती है।
हालांकि, अंतिम फैसला संबंधित स्तर पर लिया जाना बाकी है। अभी इसे संभावित व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है और आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।



