: प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। 12 अक्टूबर, सोमवार को उन्होंने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को वापस लिया जाए। ओवैसी का कहना है कि चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने से चुनाव आयोग पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।

प्रधानमंत्री पर केस हो सकता है, चुनाव आयुक्तों को छूट क्यों ?
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब यह बिल लोकसभा में पेश किया गया था, तब उन्होंने और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने इस पर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि कानून बनने से चुनाव आयोग की साख पर असर पड़ने की आशंका थी। ओवैसी ने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री के खिलाफ केस दर्ज हो सकता है, तो चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट क्यों दी जा रही है ? उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी के पुराने मामलों का भी जिक्र किया।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर भी सवाल
AIMIM प्रमुख ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली 3 सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, उनके चुने हुए केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता शामिल हैं। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था में सत्ताधारी पार्टी के पास ज्यादा ताकत रहती है और वह अपनी पसंद के व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है। उन्होंने मांग की कि चयन समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश को फिर से शामिल किया जाए।
SIR रोकने की मांग
AIMIM प्रमुख ने वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रोसेस पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटाए गए हैं और फॉर्म6 भरने के दौरान मैपिंग की जानकारी मांगी जा रही है। इस प्रक्रिया को तुरंत रोकना चाहिए और नियुक्ति से जुड़ा कानून वापस लिया जाना चाहिए।
ये खबर भी पढ़ें:
INDIA ब्लॉक के मार्च से बनाई दूरी
दिल्ली में प्रदर्शन से पहले बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर AIMIM प्रमुख ओवैसी ने कहा कि विरोध करना लोगों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि दिल्ली बंद करने से लोगों की आवाज नहीं रोकी जा सकती। हालांकि, जब उनसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर INDIA ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च पर सवाल किया गया, तो उन्होंने इससे दूरी बना ली। ओवैसी ने कहा कि मेरा इससे कोई संबंध नहीं है। मैं इसका हिस्सा नहीं हूं। ये उनका कार्यक्रम है, उन्हें करने दीजिए।



