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​27 साल बाद लौटेगा जासूसी विमान SR-71 ब्लैकबर्ड, इसके सामने कितनी चुनौतियां?

अमेरिकी वायु सेना का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा विमान SR71 ब्लैकबर्ड चर्चा में है. कहा जा रहा है कि नासा इसे फिर से हवा में उड़ाने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, नासा ने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है. हां, इतना जरूर है कि कैलिफोर्निया में नासा के आर्मस्ट्रांग फ्लाइट रिसर्च सेंटर के बाहर लगा विमान डिस्प्ले से हटा दिया गया है. इसके साथ नासा प्रमुख के कुछ बयानों ने भी अटकलों को हवा दी है. यह विमान तेज रफ्तार और ऊंची उड़ान के लिए जाना जाता था.

​27 साल बाद लौटेगा जासूसी विमान SR-71 ब्लैकबर्ड, इसके सामने कितनी चुनौतियां?

विमान को हैंगर में ले जाना और पुराने इंजीनियरों से संपर्क करना इस बात का संकेत हो सकता है कि उस पर काम चल रहा है. पर इससे उड़ान की तैयारी पक्की नहीं होती. आइए, इसी चर्चा के बहाने समझते हैं कि क्या वाकई 27 साल बाद फिर लौटेगा जासूसी विमान SR71 ब्लैकबर्ड? यदि हां तो इसके सामने कितनी चुनौतियां आएंगी?

SR71 ब्लैकबर्ड इतना खास क्यों?

SR71 को लॉकहीड कंपनी ने बनाया था. इसकी पहली उड़ान 1964 में हुई थी. अमेरिकी वायुसेना ने इसे 1966 में सेवा में शामिल किया. यह बहुत तेज और बहुत ऊंचाई पर उड़ने के लिए बनाया गया था. इसकी गति और ऊंचाई ने इसे अपने दौर का अनोखा विमान बना दिया. इस विमान का मुख्य काम दुश्मन के इलाके की जानकारी जुटाना था. इसकी तेज रफ्तार और ऊंची उड़ान के कारण इसे रोकना आसान नहीं था.

SR71 को लॉकहीड कंपनी ने बनाया था. फोटो: Getty Images

यह पारंपरिक लड़ाकू विमान की तरह हमला करने के लिए नहीं बना था. इसका उद्देश्य जानकारी इकट्ठा करना और सुरक्षित लौटना था. SR71 ने 1976 में अपनी श्रेणी में गति और ऊंचाई के रिकॉर्ड बनाए. अमेरिकी वायुसेना के रिकॉर्ड के अनुसार,यह लगभग 3,529 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंचा और करीब 85 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ा. इसके अत्यधिक रखरखाव खर्च, ऑपरेशनल लागत और सैटेलाइट और ड्रोन जैसी नई तकनीकों के आने के कारण इसे रिटायर किया गया था. विमान की आखिरी उड़ान 9 अक्टूबर 1999 को हुई थी. इसके बाद इसे उड़ान से हटाकर प्रदर्शन के लिए रखा गया.

विमान को हैंगर में क्यों ले जाया गया?

टेल नंबर 844 वाला SR71 कई वर्षों तक नासा के आर्मस्ट्रांग केंद्र के बाहर डिस्प्ले पर था. अब इसे वहां से हटाकर हैंगर में ले जाया गया. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विमान की जांच की गई और नासा ने इससे जुड़े पुराने SR71 कर्मचारियों से भी संपर्क किया. नासा ने इस कदम का पूरा कारण सार्वजनिक नहीं किया है. एजेंसी ने कहा है कि उसे विमान के इतिहास में लोगों की रुचि का पता है, लेकिन फिलहाल उसके बारे में अतिरिक्त जानकारी देने के लिए कुछ नहीं है. इस चुप्पी के कारण सवाल बढ़े हैं.

क्या विमान को फिर से उड़ाने की तैयारी है? क्या इसे केवल जांच या संरक्षण के लिए हटाया गया है? अभी इन सवालों का पक्का जवाब नहीं है. नासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन ने एक प्रजेंटेशन में नए प्रयोगात्मक विमानों और अधिक ऊंची तथा तेज उड़ान की बात की थी. इसमें दिखाए गए विमान की आकृति कुछ लोगों को ब्लैकबर्ड जैसी लगी. इससे भी चर्चा तेज हुई.

SR71 के लिए JP7 नाम का खास ईंधन चाहिए होता है. फोटो: Getty Images

सबसे बड़ी चुनौती है 27 साल पुराना ढांचा

किसी विमान को लंबे समय तक जमीन पर खड़ा रखने के बाद सीधे उड़ाना संभव नहीं होता. पहले उसकी पूरी जांच करनी पड़ती है. ढांचे, पंखों, जोड़ों, तारों, पाइपों, नियंत्रण प्रणालियों और कॉकपिट के उपकरणों को देखना जरूरी होगा. बाहर खड़े रहने के दौरान धूल, रेत, बारिश और तापमान में बदलाव का असर पड़ सकता है.

रिपोर्ट्स में पूर्व टेस्ट इंजीनियर माइक रेलजा ने आशंका जताई है कि विमान के भीतर रेत या पानी पहुंचा हो सकता है. यह उनकी विशेषज्ञ राय है, नासा की प्रकाशित तकनीकी जांच का नतीजा नहीं. फिर भी इतने लंबे समय तक विमान के निष्क्रिय रहने से विस्तृत निरीक्षण जरूरी होगा. हर छोटी खराबी का भी पता लगाना होगा, क्योंकि तेज गति और ऊंचाई पर उड़ान में गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है.

इंजन और ईंधन की मुश्किलें भी कम नहीं

SR71 में खास J58 इंजन लगाए गए थे. इन इंजनों को विमान की विशेष जरूरतों के अनुसार बनाया गया था. इन्हें चलाने के लिए आम हवाई ईंधन नहीं, बल्कि JP7 नाम का खास ईंधन चाहिए. इसकी नियमित आपूर्ति अब उपलब्ध नहीं है. अगर विमान उड़ाने की योजना बनती है, तो ईंधन जुटाना या फिर से तैयार करना एक बड़ा काम होगा. इंजन को शुरू करने के लिए ट्राइएथिलबोरेन नाम का रसायन भी इस्तेमाल होता था. इसके अलावा विशेष इंजन ऑयल और हाइड्रोलिक तरल की जरूरत पड़ती है.

ये सभी चीजें सामान्य विमान के रखरखाव की सूची में नहीं आतीं. इन्हें सुरक्षित ढंग से हासिल करना, जांचना और इस्तेमाल के योग्य बनाना होगा. इंजन कई दशक से नियमित रखरखाव में नहीं रहे हैं. उनके अंदरूनी हिस्सों की जांच और मरम्मत आसान नहीं होगी. केवल इंजन चालू होना पर्याप्त नहीं है. उन्हें भरोसेमंद तरीके से काम करना होगा. उड़ान से पहले जमीन पर कई स्तरों के परीक्षण भी जरूरी होंगे.

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— Historic Vids February 16, 2024

पुर्जे और खास उपकरण कहां से आएंगे?

SR71 के लिए बने कई पुर्जे अब नियमित रूप से नहीं बनाए जाते. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2007 में विमान बेड़े के बहुत से अतिरिक्त पुर्जे नष्ट कर दिए गए थे. इससे आज मरम्मत के लिए जरूरी सामान जुटाना कठिन हो सकता है. कुछ हिस्सों को दोबारा बनाना पड़ेगा. इसके लिए पुराने डिजाइन, तकनीकी दस्तावेज और निर्माण की जानकारी खोजनी होगी. विमान के रखरखाव में खास ट्रॉली और जमीन पर इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जरूरी होते हैं.

इंजन निकालने, कुछ हिस्सों को संभालने और विमान की जांच के लिए विशेष व्यवस्था चाहिए. पुराने उपकरण उपलब्ध न हों, तो नए उपकरण बनाने पड़ सकते हैं. इसका अर्थ है अधिक समय, लागत और परीक्षण. कुछ विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई है कि दूसरे संग्रहालयों में रखे विमानों से कुछ हिस्से लिए जा सकते हैं. लेकिन यह केवल एक संभावित रास्ता है. किसी हिस्से को दूसरे विमान में लगाने से पहले उसकी जांच और अनुकूलता साबित करनी होगी.

प्रशिक्षित लोग और सुरक्षा भी होगी बड़ी चुनौती

SR71 को उड़ाने और उसकी देखभाल करने के लिए खास प्रशिक्षण चाहिए. आज के पायलट और तकनीकी दल इस विमान के पुराने अनुभव से सीधे लाभ नहीं उठा सकते, जब तक उन्हें विस्तृत प्रशिक्षण न मिले. पुराने दस्तावेज मदद कर सकते हैं. पर दस्तावेज पढ़ना और वास्तविक उड़ान की तैयारी करना अलग बातें हैं.

इंजीनियरों, तकनीशियनों और पायलटों की टीम बनानी होगी. उन्हें विमान की प्रणालियों, आपात स्थितियों और रखरखाव के तरीकों पर प्रशिक्षण देना होगा. पुराना अनुभव रखने वाले लोग सलाह दे सकते हैं. लेकिन नई टीम को भी जिम्मेदारी संभालने लायक बनाना जरूरी होगा. सुरक्षा का सवाल सबसे अहम है. विमान को उड़ाने से पहले हर प्रणाली की जांच होगी. फिर जमीन पर परीक्षण, कम जोखिम वाले परीक्षण और धीरेधीरे आगे बढ़ने की जरूरत पड़ सकती है. ऐसी प्रक्रिया में समय लगता है. किसी जल्दबाजी से विमान और लोगों दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है.

क्या नासा को पुराने विमान की जरूरत है?

नासा प्रयोगात्मक विमानों का इस्तेमाल नई तकनीकों और उड़ान से जुड़े सवालों की जांच के लिए करता है. SR71 की तेज और ऊंची उड़ान क्षमता उसे अनुसंधान के लिए एक अनोखा मंच बना सकती है. इससे उच्च गति पर हवा के व्यवहार, इंजन, ढांचे और ताप के असर से जुड़े परीक्षण किए जा सकते हैं. फिर भी यह जरूरी नहीं कि नासा का लक्ष्य पुराने SR71 को नियमित उड़ान में लौटाना ही हो. विमान को जमीन पर जांचना, उससे जानकारी लेना या उसे नए प्रयोगों के संदर्भ में उपयोग करना भी संभव है. किसी नए प्लेन का डिजाइन भी पुराने ब्लैकबर्ड से प्रेरणा ले सकता है.

वापसी संभव, पर आसान एकदम नहीं

SR71 की वापसी रोमांचक विचार है. यह विमान आज भी इंजीनियरिंग इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है. लेकिन इसे दोबारा उड़ाना केवल एक विमान को हैंगर से बाहर निकालने का काम नहीं होगा. इसके लिए ढांचे की जांच, इंजन की मरम्मत, खास ईंधन, पुर्जे, उपकरण, प्रशिक्षित लोग और कठोर सुरक्षा परीक्षण चाहिए. इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि SR71 कभी उड़ सकता है या नहीं. सवाल यह है कि क्या उसे सुरक्षित और व्यावहारिक तरीके से उड़ाने के लिए जरूरी संसाधन जुटाए जा सकते हैं. नासा की आधिकारिक पुष्टि के बिना कोई अंतिम दावा करना जल्दबाजी होगी.

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