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​भारत में स्टार्टअप्स का डंका! 110 कंपनियां जल्द बनेंगी यूनिकॉर्न, 5 साल में दोगुनी हुई संख्या

देश में यूनिकॉर्न बनने की संभावाने वाले स्टार्टअप की संख्या बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में विविधता भी आई है. एएसके प्राइवेट वेल्थ हुरुन इंडिया चीता इंडेक्स, 2026 में शामिल स्टार्टअप की संख्या पांच साल में दोगुने से अधिक बढ़कर 110 हो गई है. अब फिनटेक और सॉफ्टवेयरएजएसर्विस के साथ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, क्लीन टेक तथा एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनियां भी इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने की दौड़ में हैं. इस इंडेक्स में चीता से आशय वर्ष 2000 या उसके बाद स्थापित ऐसी नॉनलिस्टिड स्टार्टअप कंपनी से है, जिसका वैल्यूएशन 20 करोड़ से 50 करोड़ डॉलर के बीच है और जिसके अगले पांच वर्षों में यूनिकॉर्न बनने की संभावना मानी जा रही है.

​भारत में स्टार्टअप्स का डंका! 110 कंपनियां जल्द बनेंगी यूनिकॉर्न, 5 साल में दोगुनी हुई संख्या

एएसके प्राइवेट वेल्थ हुरुन इंडिया चीता इंडेक्स में शामिल 110 कंपनियों का कुल वैल्यूएशन तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक है. इनका औसत वैल्यूएशन करीब 2,820 करोड़ रुपए है और ये कंपनियां कुल 1.10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं. हुरुन रिसर्च इंस्टिट्यूट मूल्यांकन के आधार पर स्टार्टअप को तीन श्रेणियों…चीता, गैजेल और यूनिकॉर्न…में बांटा गया है. गैजेल में ऐसी उच्च क्षमता वाली कंपनियां शामिल हैं, जिनके अगले तीन वर्षों में यूनिकॉर्न बनने की उम्मीद है, जबकि यूनिकॉर्न वे निजी स्टार्टअप हैं जिनका बाजार मूल्यांकन एक अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. ताजा सूचकांक चीता श्रेणी पर केंद्रित है.

ये कंपनियां हुई शामिल

बयान के अनुसार, 2026 के सूचकांक में 110 चीता शामिल हैं, जबकि 2021 में सूचकांक की शुरुआत के समय इनकी संख्या 54 थी. यानी पांच वर्षों में इनकी संख्या 104 प्रतिशत बढ़ी, जो सालाना करीब 15 प्रतिशत की संचयी वृद्धि के बराबर है. इस साल 43 नई कंपनियों ने सूची में प्रवेश किया, जो कुल चीता का एकतिहाई से अधिक है. नए प्रवेश करने वालों में स्वच्छ परिवहन क्षेत्र की ब्लू एनर्जी मोटर्स, मैटर, पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी और रिवर मोबिलिटी, एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र की सागर डिफेंस इंजीनियरिंग, ध्रुव स्पेस और दिगानतारा, कृत्रिम मेधा क्षेत्र की सिंपलीस्मार्ट, रॉकेट, क्यूपीआईएआई, फ्लैम और फ्रीहैंड तथा सेवा क्षेत्र की स्नैबिट, प्रोंटो और ऑलहोम शामिल हैं. बयान के मुताबिक, एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र में चीता की संख्या 2023 के एक से बढ़कर 2026 में पांच, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में चार से बढ़कर आठ और स्वच्छ प्रौद्योगिकी में तीन से बढ़कर पांच हो गई. एक साल के दौरान 43 चीता सूची में शामिल हुए, 10 गैजेल श्रेणी में पहुंचे, तीन सीधे यूनिकॉर्न बने और छह कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुईं.

कुछ ऐसे देखने को मिले आंकड़े

क्षेत्रवार फिनटेक कंपनियों में 17 चीता के साथ सबसे बड़ा क्षेत्र रहा. इसके बाद सॉफ्टवेयरएजएसर्विस में 16 और ईकॉमर्स में 12 चीता शामिल हैं. बेंगलुरु में 36 चीता हैं, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 25 और मुंबई में 16 चीता हैं. एएसके प्राइवेट वेल्थ के कोफाउंडर, मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक राजेश सलूजा ने कहा कि भारत का उद्यमिता परिदृश्य महत्वपूर्ण बदलाव के दौर में है. उन्होंने कहा कि एएसके प्राइवेट वेल्थ हुरुन इंडिया चीता सूचकांक, 2026 से पता चलता है कि अगली पीढ़ी के तेजी से बढ़ने वाले कारोबार पारंपरिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों से आगे निकल रहे हैं और इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, एयरोस्पेस एवं रक्षा तथा कृत्रिम मेधा का महत्व लगातार बढ़ रहा है. यह विविधता भारत की उद्यमशील प्रतिभा की व्यापकता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने वाले कारोबार खड़े करने की बढ़ती महत्वाकांक्षा को बताती है.

5 साल में दोगुना हुआ चीता ग्रुप

बयान में कहा गया कि 2021 के बाद से चीता समूह लगभग दोगुना हो गया है और उसका संचयी राजस्व भी मजबूत गति से बढ़ा है. कई कंपनियां गैजेल और यूनिकॉर्न श्रेणी में पहुंची हैं या शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई हैं. यह संकेत देता है कि स्टार्टअप परिवेश केवल नई कंपनियां बनाने से आगे बढ़कर स्थायी मूल्य और संपत्ति सृजन की दिशा में बढ़ रहा है. हुरुन इंडिया के फाउंडर एवं मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने कहा कि पश्चिम एशिया में संकट की पृष्ठभूमि के कारण यह साल कारोबार खड़ा करने के लिहाज से आसान नहीं रहा. इसके बावजूद भारतीय संस्थापकों ने कंपनियां बनाना और उन्हें आगे बढ़ाना जारी रखा. उन्होंने कहा कि पांच साल पहले यह तर्क दिया गया था कि भारत को उपभोक्ता इंटरनेट के नएनए रूपों के बजाय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, ऊर्जा बदलाव और कृत्रिम मेधा जैसे क्षेत्रों में अधिक कंपनियों की जरूरत है. इस साल का चीता समूह इसी सोच के साकार होने का प्रमाण है. चीता समूह उसी बदलाव को दर्शाता है.

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