Stock Market Crash: गुरुवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए निराशाजनक रहा. बाजार खुलते ही सेंसेक्स, निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स में 1 फीसदी तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. इस भारी बिकवाली के पीछे कोई एक कारण नहीं था. दुनिया भर में बन रहे आर्थिक हालात ने घरेलू बाजार का सेंटीमेंट पूरी तरह से बिगाड़ दिया. सबसे बड़ा झटका कच्चे तेल की कीमतों से लगा. इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. कच्चे तेल में इस तरह की आग लगना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहा है. इससे देश का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, साथ ही महंगाई बेकाबू होने का डर भी पैदा हो जाता है.

इसके साथ ही अमेरिका से भी इक्विटी मार्केट के लिए नकारात्मक संकेत मिले. वहां 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11% के उच्च स्तर पर पहुंच गई. जब भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इस तरह का तेज उछाल आता है, ग्लोबल इक्विटी मार्केट के वैल्युएशन पर भारी दबाव पड़ता है. विदेशी निवेशक अपना पैसा निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जाने लगते हैं. इन्हीं दोनों बड़े ग्लोबल फैक्टर्स ने आज भारतीय बाजार की कमर तोड़ दी.
इंश्योरेंस शेयरों पर IRDAI का प्रहार
बाजार की इस चौतरफा गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों को उठाना पड़ा. HDFC लाइफ, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज फिनसर्व जैसे बड़े दिग्गज नाम आज टॉप लूजर्स की लिस्ट में शामिल रहे. इंश्योरेंस सेक्टर में आई इस भारी गिरावट का सीधा कनेक्शन इंश्योरेंस रेगुलेटर के एक नए फैसले से है.
IRDAI ने हाल ही में डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन, एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट की लिमिट तय करने को लेकर एक अहम कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. इस प्रस्ताव में कई ऐसे नियम हैं जो कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकते हैं. रेगुलेटर चाहता है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलने वाले भारीभरकम पेआउट पर लगाम लगाई जाए. इससे पॉलिसीधारकों की लागत कम होगी. अभी तक इंश्योरेंस इंडस्ट्री आक्रामक ‘पुश’ सेल्स मॉडल पर काम करती आई है, यानी ग्राहकों पर पॉलिसी बेचने का दबाव बनाया जाता है. अब रेगुलेटर इसे बदलकर कस्टमरड्रिवन, एफर्टबेस मॉडल बनाने की तैयारी कर रहा है. निवेशकों को डर है कि इन बड़े बदलावों से कंपनियों के मार्जिन में कमी आएगी. इसी डर के चलते आज इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों में जमकर मुनाफावसूली हुई.
मिडकैप शेयरों ने किया हैरान
बाजार में इतनी भारी उठापटक के बीच एक हिस्सा ऐसा है जो पूरी मजबूती से खड़ा रहा. लार्जकैप शेयरों में जहां निवेशकों के बीच डर का माहौल है, वहीं मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में घरेलू निवेशक लगातार पैसा लगा रहे हैं. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार का मानना है कि इन सेगमेंट्स में लगातार मजबूत डोमेस्टिक लिक्विडिटी आ रही है.
वैल्युएशन ज्यादा होने के बावजूद भारतीय निवेशक ग्रोथ वाले शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना पसंद कर रहे हैं. यही कारण है कि मिडकैप, स्मॉलकैप शेयर बाजार की इस गिरावट का डटकर मुकाबला कर रहे हैं. इसके उलट लार्जकैप शेयर सही वैल्युएशन पर होने के बावजूद सुस्त नजर आ रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये ट्रेंड हमेशा ऐसा नहीं रहेगा. अगर कच्चे तेल, बॉन्ड यील्ड की कीमतों में जल्द नरमी नहीं आई, तो एक समय बाद इन छोटी कंपनियों के शेयरों में भी बड़ा करेक्शन आ सकता है.



