सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए दिल्ली पुलिस को पूरी छूट देने के निर्देश की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि अदालत इस बात को लेकर सचेत है कि प्रदर्शन करने वालों में कई युवा छात्र हैं। उनके भविष्य और परिवारों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

Supreme Court has rejected a plea seeking directions to give the Delhi Police a free hand to deal with protesters.
A bench led by CJI Surya Kant said the court was conscious that many of those protesters were young students and that their future and families had to be kept in…
— ANI October 9, 2026
युवा छात्रों का भविष्य और उनके मातापिता भी महत्वपूर्ण
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत के सामने युवा छात्र और प्रदर्शनकारी हैं। उनके मातापिता और उनके लंबे भविष्य को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि अदालत नहीं चाहती कि युवा छात्र अनावश्यक रूप से अदालती सुनवाई और कानूनी कार्यवाही में उलझे रहें।
CJI ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में फैसला लेते समय प्रदर्शनकारियों के भविष्य और उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी देखना जरूरी है। अदालत की यह टिप्पणी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में युवाओं के प्रति संतुलित दृष्टिकोण रखने की जरूरत को रेखांकित करती है।
गंभीर अपराध के आरोपियों को नहीं मिलेगी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि उसके पहले के आदेशों के तहत मिली सुरक्षा का लाभ सभी प्रदर्शनकारियों को नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा कि जिन लोगों पर गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं या जिन्हें आदतन अपराधी बताया गया है, वे इस संरक्षण के दायरे में नहीं आते।
इस स्पष्टीकरण के साथ अदालत ने स्पष्ट किया कि युवा छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखने का मतलब गंभीर अपराधों के आरोपियों को स्वतः राहत देना नहीं है। ऐसे लोगों के मामलों में पहले के आदेशों में निर्धारित शर्तें और कानूनी स्थिति लागू रहेंगी।



