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​कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं स्वामी प्रसाद मौर्या, आज दिल्ली में राहुल गांधी से होगी मुलाकात

उत्तर प्रदेश विधानसभा की तैयारियां जोर जोर से चल रही हैं. सभी राजनातिक दल सूबे की सत्ता पर काबिज होने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं. चुनाव से पहले नेताओं का पाला बदलने का दौर भी जारी है. इस बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है. सूत्रों की मानें तो पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या आज को कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं.

​कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं स्वामी प्रसाद मौर्या, आज दिल्ली में राहुल गांधी से होगी मुलाकात

सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश की राजनीति के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या के आज दिल्ली पहुंचने की खबर है, जहां वो राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं. बताया जा रहा है कि इसके बाद वो कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं. इस हाईप्रोफाइल मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है. सूत्रों मुताबिक मौर्या के अलावा मथुरा के पूर्व विधायक श्याम सुंदर शर्मा और दिल्ली के पूर्व विधायक अशोक कुमार भी कांग्रेस में शामिल होंगे.

उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक प्रभावशाली नेता

स्वामी प्रसाद मौर्या उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक प्रभावशाली और चर्चित ओबीसी चेहरा रहे हैं. मौर्या बसपा और बीजेपी सरकार में मंत्री रहे हैं. वो समाजवादी पार्टी में भी रहे चुके हैं. हालांकि बीते कुछ साल से वो अपनी अलग पार्टी बनाकर राजनीति कर रहे थे. वहीं अब उनके कांग्रेस में शामिल होने की खबर सामने आई है.

राजनीतिक करियर की शुरुआत

स्वामी प्रसाद मौर्या ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत जनता दल से की थी और बाद में बहुजन समाज पार्टी में लंबे समय तक रहे.
2016 में वो बसपा छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बने.

2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्या ने बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था. सपा में कुछ समय तक वो विधान परिषद के सदस्य रहे. इसके बाद मतभेदों के चलते उन्होंने सपा से भी इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी ‘राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी’ बनाई थी.

कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ सकते हैं चुनाव

सूत्रों के मुताबिक स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी कुछ चुनिंदा सीटों पर कांग्रेस के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ सकती है. यूपी चुनाव से ठीक पहले इस तरह की राजनीतिक हलचल से राज्य का सियासी पारा हाई हो गया है. मौर्या का यह कदम राज्य के पिछड़ें और दलित वोट बैंक को साधने के लिहाज से काफी अहम साबित हो सकता है. हालांकि फिलहाल दोनों दलों की तरफ से इसको लेकर आधिकारिक तौर पर विलय या गठबंधन की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से मुलाकात का बात सामने आ रही है उससे राजनीतिक फेरबदल की संभावना जताई जा रही है.

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