नई दिल्ली। तमिलनाडु में पूर्व मंत्री और डीएमके नेता के.एन. नेहरू की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय ने कथित ₹1,020 करोड़ के टेंडर घोटाले में नेहरू समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

क्या है आरोप?
एफआईआर के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग के सरकारी ठेकों में कथित तौर पर हेरफेर की गई। आरोप है कि ठेकेदारों से कॉन्ट्रैक्ट की रकम का 7.5 से 10 प्रतिशत कथित तौर पर “पार्टी फंड” के नाम पर अवैध रूप से लिया गया। जांच एजेंसी ने इससे करीब ₹1,020 करोड़ के कथित गलत लाभ का आरोप लगाया है।
13 लोगों पर मामला दर्ज
मामले में नेहरू के दो भाइयों, करीबी सहयोगियों, दो पूर्व विधायकों, सरकारी अधिकारियों और ठेकेदारों के नाम भी शामिल हैं। DVAC की कार्रवाई दिसंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दी गई 258 पन्नों की रिपोर्ट के बाद हुई।
पहले हो चुकी है छापेमारी
5 सितंबर को DVAC ने नेहरू और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर तमिलनाडु के कई स्थानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद अब एफआईआर दर्ज होने से मामला और गंभीर हो गया है।
हालांकि, एफआईआर में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है। नेहरू ने पहले आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई को राजनीतिक दबाव बताया था।



