प्रेमानंद महाराज कहते हैं राग , द्वेष, लोभ, शोक मोह, भय, मद , दूसरे के गुणों में दोष निकालना, छल, हिंसा, दूसरों की उन्नति देखकर जलना, ईर्ष्या, तृष्णा, प्रमाद, भूख, और नींद, ये शत्रु हैं. इनपर विजय प्राप्त करना चाहिए.

प्रेमानंद महाराज ने राजपाल यादव से बात करते हुए कहा था कि हर हालात, दुख से लड़ना सीखना चाहिए हारना नहीं. महाराज ने हर समस्या में मजबूत रहने, खुद को न टूटने देने और भगवान को याद करने को कहा था. आप भी मुसीबत के समय इस बात को गांठ बांध सकते हैं.
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि कर्म को ही सेवा मानना चाहिए. नौकरी से लेकर व्यापार और समाज सेवा तक…सारी चीजों को ईश्वर मानकर करना चाहिए. खुश रहना हो तो छलकपट, बेईमानी, अधर्म का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए.
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, युवाओं को सुबह जागने के बाद व्यायाम करना चाहिए. नशे और गलत कर्मों से सदैव दूर रहना चाहिए. उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि रात को समय से सो जाना चाहिए और सुबह 6 बजे जागना चाहिए. इसके बाद वज्रासन में बैठकर गुनगुना पानी पीना चाहिए. इसी के साथ दौड़ करनी चाहिए. देर तक जागते रहना और देर तक सोना सही नहीं है.
जीवन में जब आप बहुत हारा हुआ महसूस करें तो प्रेमानंद महाराज की बताई इस बात को ध्यान में रखें कि जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई अपने मन से होती है. अगर इसपर नियंत्रण पा लें तो आप अपने जीवन को हल्का और आनंदमय बना सकते हैं. जब कोई रास्ता न सूझे तो नाम जप का सहारा लें. नाम जप बड़ी से बड़ी बुरी आदतों को भी जड़ से मिटा सकता है और आत्मबल पैदा करता है.



