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​टाटा संस के IPO की खबर से झूम उठे कंपनी के स्टॉक्स, TCS, Tata Chemical समेत इन शेयरों में आई 14% की तेजी

टाटा ग्रुप के शेयरों में गुरुवार दोपहर जबरदस्त तेजी आई और वे 14% तक चढ़ गए. यह तेजी तब आई जब टाटा संस ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल और 5 साल के लिए बढ़ाने को मंजूरी दी गई और कई दिनों से चल रहे इंतजार के बाद ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के IPO की प्रक्रिया शुरू हुई.

​टाटा संस के IPO की खबर से झूम उठे कंपनी के स्टॉक्स, TCS, Tata Chemical समेत इन शेयरों में आई 14% की तेजी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने की मंजरी इसलिए दी है, क्योंकि ग्रुप की होल्डिंग कंपनी IPO लाने की तैयारी कर रही है, जिसका उसने लंबे समय से विरोध किया था. हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स, अब भी चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दे सकता है, जिसके पास कंपनी में बहुमत हिस्सेदारी है.

टाटा ग्रुप के शेयरों में आई तेजी

टाटा संस में 2.53% हिस्सेदारी रखने वाली टाटा केमिकल्स के शेयर की कीमत 14% बढ़कर 832 रुपये प्रति शेयर हो गई. टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के शेयर की कीमत 6% बढ़कर 720 रुपये हो गई. TCS के शेयरों में, 3% से ज़्यादा की बढ़त हुई, जबकि Tata Motors PV, Tata Elxsi, Tata Tech, Tata Steel और दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई.

एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल

एन चंद्रशेखरन ने अगस्त में टाटा सन्स के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले टाटा सन्स के बोर्ड ने उनके दोबारा चेयरमैन बनाए जाने के फैसले को टाल दिया था. रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ग्रुप के भीतर नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंताएं जताई गई थीं. नोएल टाटा भी चंद्रशेखरन के लिए दो साल के कार्यकारी कार्यकाल के पक्ष में थे. यह प्रस्ताव समूह में कार्यकारी पदों के लिए 65 वर्ष की रिटायरमेंट एज के लिहाज से था. एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा सन्स की कमान संभाली थी. इससे पहले वह TCS की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. वह रतन टाटा के बाद टाटा परिवार से बाहर के पहले पेशेवर मैनेजर बने, जिन्होंने टाटा सन्स जैसी होल्डिंग कंपनी का नेतृत्व किया.

RBI ने खारिज किया था CIC का आवेदन

चंद्रशेखरन के कार्यकाल को ऐसे समय में बढ़ाया गया है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में टाटा सन्स के सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन को अपनी मर्जी से सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था. कंपनी चाहती थी कि उसे एक अनरजिस्टर्ड कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया जाए. RBI के इस फैसले से भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा सन्स के शेयर बाजार में लिस्ट होने का रास्ता साफ हो सकता है. टाटा ग्रुप का कारोबार कई क्षेत्रों और देशों में फैला हुआ है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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