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​मेनोपॉज से 15 साल पहले ही शरीर में दिखने लगते हैं ये 5 संकेत, 10 लाख महिलाओं पर शोध में हुआ खुलासा

कभी अचानक बहुत गर्मी लगना, कभी रात में पसीना आना, तो कभी बिना किसी खास वजह के थकान महसूस होना. महिलाओं के शरीर में उम्र बढ़ने के साथ ऐसे कई बदलाव होते हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है. लेकिन क्या आप जानती हैं कि इन बदलावों के पीछे मेनोपॉज यानी पीरियड्स हमेशा के लिए बंद होने की प्रक्रिया भी हो सकती है?

​मेनोपॉज से 15 साल पहले ही शरीर में दिखने लगते हैं ये 5 संकेत, 10 लाख महिलाओं पर शोध में हुआ खुलासा

इतना ही नहीं, शरीर में इससे जुड़े बदलाव पीरियड्स बंद होने से करीब 10 से 15 साल पहले ही शुरू हो सकते हैं. डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक नए अध्ययन में सामने आया है कि मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव हमेशा धीरेधीरे नहीं होते, बल्कि कई अंगों में अचानक भी बदलाव दिखाई दे सकते हैं. यह अध्ययन महिलाओं की सेहत को समझने के लिए एक नई दिशा दिखाता है.

क्या है मेनोपॉज और क्यों होता है शरीर में बदलाव?

मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक प्राकृतिक पड़ाव है. आमतौर पर इस दौरान महिलाओं के पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं. इसके पीछे मुख्य वजह ovaries की गतिविधियों में कमी और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन के लेवल में बदलाव होना है. एस्ट्रोजन महिलाओं के शरीर में कई जरूरी काम करता है. यह सिर्फ प्रजनन क्षमता से जुड़ा नहीं है, बल्कि हड्डियों और शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं पर भी असर डालता है.

पीरियड्स बंद होने से पहले होने लगते हैं बदलाव

जब हार्मोन का लेवल चेंज होता है, तो इसका असर शरीर के अलगअलग हिस्सों पर पड़ सकता है. कुछ महिलाओं को गर्मी लगने, नींद में परेशानी, मूड बदलने और थकान जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. हालांकि, हर महिला का अनुभव एक जैसा नहीं होता. किसी में लक्षण ज्यादा दिखते हैं, तो किसी में बहुत कम. नेचर मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पाया कि मेनोपॉज से जुड़े कुछ हार्मोनल बदलाव पीरियड्स बंद होने से लगभग 15 साल पहले ही तेज होने लगते हैं.

मेनोपॉज से पहले शरीर में क्या बदलता है?

अध्ययन में अमेरिका और इजरायल की 10 लाख से ज्यादा महिलाओं के तीन करोड़ नहीं, बल्कि 30 करोड़ से अधिक लैब टेस्ट का विश्लेषण किया गया. शोधकर्ताओं के मुताबिक, एंटीमुलरियन हार्मोन का स्तर करीब 15 साल पहले तेजी से गिरने लगता है. यह हार्मोन ovaries में बचे अंडों के भंडार से जुड़ा होता है. वहीं, फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन का लेवल बढ़ने लगता है. एस्ट्रोजन का एक प्रमुख रूप एस्ट्राडियोल भी मेनोपॉज से लगभग 12 साल पहले तेजी से कम होने लगता है.

मेनोपॉज का असर कई अंगों पर भी पड़ता है

इसका मतलब यह है कि शरीर में बदलाव शुरू होने के लिए पीरियड्स बंद होने का इंतजार नहीं करना पड़ता. इस अध्ययन की सबसे अहम बात यह है कि मेनोपॉज का असर केवल महिलाओं के प्रजनन तंत्र तक सीमित नहीं रहता. शोधकर्ताओं ने पाया कि शरीर के कई अंगों और खून से जुड़ी जांचों में भी बदलाव दिखाई देते हैं. अमेरिका के आंकड़ों में जांचे गए 90 में से 52 तरह के लैब टेस्ट में मेनोपॉज के आसपास अचानक बदलाव दर्ज किए गए.

हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है

इनमें हड्डियों की सेहत, लिवर और किडनी के कामकाज, खून में मौजूद वसा और दूसरे रासायनिक तत्वों से जुड़ी जांचें शामिल थीं. एस्ट्रोजन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है. इसका स्तर कम होने पर हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है. वहीं, लिवर खून में कोलेस्ट्रॉल और वसा को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है. हार्मोन में बदलाव का असर इन प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है.

समय रहते जानकारी और देखभाल क्यों है जरूरी?

इस अध्ययन से पता चलता है कि मेनोपॉज से जुड़े हार्मोनल बदलावों को समय रहते समझकर महिलाओं की सेहत की बेहतर देखभाल की जा सकती है. हार्मोन थेरेपी कुछ बदलावों को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसे डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए. मेनोपॉज सिर्फ पीरियड्स बंद होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है. इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें.

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