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​पिछली दिवाली से इस दिवाली तक 60 फीसदी तक गिर चुके हैं ये शेयर, क्या अब आएगी चमक?

भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता एक साल मुश्किल भरा रहा है. इस दौरान बाजार में कई बार तेजी आई, लेकिन हर बार उतारचढ़ाव और बिकवाली ने निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया. वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा.

​पिछली दिवाली से इस दिवाली तक 60 फीसदी तक गिर चुके हैं ये शेयर, क्या अब आएगी चमक?

23 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले दिवाली से इस दिवाली तक निफ्टी 50 में 10.3% की गिरावट आई है. वहीं, निफ्टी 500 भी 7.8% नीचे आ गया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 100 में 4.5% और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 3.7% की कमजोरी आई.

कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट

इस साल बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा. पिछले दिवाली से अब तक 83 लार्जकैप कंपनियों के शेयर गिर चुके हैं. इनमें कुछ शेयरों में करीब 60% तक की गिरावट आई है. इस लिस्ट में स्विगी, टाटा मोटर्स, एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, आईटीसी, वेदांता, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कंपनियां शामिल हैं.

दूसरी तरफ, बाजार में तेजी दिखाने वाली बड़ी कंपनियों की संख्या काफी कम रही. केवल 43 लार्जकैप शेयर ही पिछले दिवाली के मुकाबले बढ़त दर्ज कर पाए. इनमें बीएचईएल, हिताची एनर्जी, एसएएमआईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, हिंडाल्को और अडानी पावर शामिल हैं. इन कंपनियों के शेयरों में अधिकतम 70% तक की तेजी आई. ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि क्या आने वाले साल में बड़ी कंपनियों के शेयर फिर से अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे?

क्या लार्जकैप शेयरों की वापसी का समय आ गया है?

बाजार के जानकारों का मानना है कि पिछले एक साल की गिरावट के बाद कई बड़े शेयरों की कीमतें अब आकर्षक स्तर पर आ गई हैं. कुछ कंपनियों के शेयरों में उनके कारोबार की वास्तविक स्थिति के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई है. ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इनमें अवसर बन सकता है. निफ्टी का वैल्यूएशन भी पहले के मुकाबले कम हुआ है. फिलहाल निफ्टी अपने अगले एक साल की अनुमानित कमाई के मुकाबले 16.4 गुना पर कारोबार कर रहा है. इसका लंबी अवधि का औसत 18.4 गुना है. यानी बाजार का वैल्यूएशन अपने पुराने औसत से नीचे आ चुका है.

हालांकि, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली अभी भी बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है. विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय कंपनियों के शेयर लगातार बेच रहे हैं. इससे बड़ी कंपनियों के शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला है. सितंबर तिमाही में कम से कम 53 ऐसी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटी, जिनका बाजार मूल्य 1 लाख करोड़ रुपये या उससे ज्यादा है. एचडीएफसी बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 2.43 प्रतिशत अंक घट गई. इस साल बैंक के शेयर में करीब 30% की गिरावट आई है. आईटीसी में विदेशी हिस्सेदारी 1.01 प्रतिशत अंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.55 प्रतिशत अंक कम हुई.

देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 0.52 प्रतिशत अंक घटी. इस साल कंपनी का शेयर करीब 24.2% टूट चुका है. टीसीएस, भारती एयरटेल, मारुति सुजुकी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस जैसी कंपनियों में भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी और शेयर कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.

आगे कैसा रह सकता है शेयर बाजार?

एक्स्पर्ट्स मानते हैं कि भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट कुछ अच्छे शेयरों में निवेश का अवसर दे सकती है. हालांकि, वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित हैं और निवेशकों का भरोसा लौटने में समय लग सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग, सेवाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, कर्ज की उपलब्धता और निजी कंपनियों के निवेश से लगातार समर्थन मिल रहा है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 202627 के लिए देश की वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है. यह दिखाता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. हालांकि, कच्चे तेल की महंगाई और कमजोर मानसून अर्थव्यवस्था के लिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं. इससे महंगाई बढ़ने, ग्रामीण मांग घटने और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आने का खतरा है. आगे शेयर बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक महंगाई, ब्याज दरों, विदेशी निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी. इसलिए बाजार में लगातार तेजी आने की उम्मीद करना सही नहीं होगा.

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