
सोने की कीमतें बढ़ने के बीच लैब में सोना बनाने की तकनीक चर्चा में है। सैन फ्रांसिस्को की कंपनी मैराथन फ्यूजन ने दावा किया है कि न्यूक्लियर फ्यूजन तकनीक की मदद से पारे को सोने में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया को न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन कहा जाता है, जिसमें किसी तत्व के परमाणु के केंद्रक में बदलाव करके उसे दूसरे तत्व में बदला जाता है।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है—क्या लैब में तैयार सोना प्राकृतिक सोने जितना शुद्ध होगा? और क्या भविष्य में इस तकनीक से बाजार में सोने की कीमतें कम हो सकती हैं? इन सवालों का जवाब समझने के लिए पहले इसकी वैज्ञानिक प्रक्रिया जानना जरूरी है।
पारे से सोना कैसे बनाया जा सकता है?
सामान्य रासायनिक प्रक्रियाओं से पारे को सोने में नहीं बदला जा सकता, क्योंकि दोनों तत्वों के परमाणु केंद्रक में प्रोटॉन की संख्या अलग होती है। पारे के परमाणु में 80 प्रोटॉन होते हैं, जबकि सोने के परमाणु में 79।
न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन में परमाणु के केंद्रक को बदलकर एक तत्व को दूसरे तत्व में बदला जाता है। यह प्रक्रिया विशेष परमाणु या कण-भौतिकी परिस्थितियों में ही संभव है।
मैराथन फ्यूजन के दावे के मुताबिक, उसकी प्रस्तावित तकनीक में फ्यूजन प्रक्रिया से निकलने वाले उच्च ऊर्जा वाले न्यूट्रॉन का उपयोग करके पारे के एक विशेष समस्थानिक को सोने में बदलने की योजना है। हालांकि, कंपनी के दावे और व्यावसायिक स्तर पर साबित हो चुकी उत्पादन तकनीक के बीच अंतर समझना जरूरी है।
क्या लैब में बना सोना प्राकृतिक सोने जितना शुद्ध होगा?
इसका जवाब है—सैद्धांतिक रूप से हां, लेकिन मैराथन फ्यूजन के मामले में अभी इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है।
सोने का रासायनिक प्रतीक Au है और इसका स्थिर समस्थानिक Au-197 होता है। अगर प्रयोग से शुद्ध Au-197 प्राप्त हो जाए और उसमें दूसरी धातुओं या रेडियोधर्मी पदार्थों की मिलावट न हो, तो उसके परमाणु प्राकृतिक सोने के परमाणुओं जैसे ही होंगे।
मैराथन फ्यूजन का कहना है कि उसकी प्रक्रिया में पारा-198 से रेडियोधर्मी पारा-197 बनता है, जो बाद में क्षय होकर स्थिर सोना-197 बन सकता है। लेकिन कंपनी ने तैयार सोने की कुल मात्रा, उसकी शुद्धता और उत्पादन की दक्षता के बारे में पर्याप्त सार्वजनिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इस दावे की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि भी अभी सामने नहीं आई है। <Cite refs={[“turn930455search1″,”turn930455search2”]}/>
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनी ने बाजार में बेचने योग्य, पूरी तरह शुद्ध सोना बड़े पैमाने पर तैयार कर लिया है।
CERN के प्रयोग से कितना अलग है यह दावा?
यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन CERN के वैज्ञानिकों ने लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में हुए प्रयोगों के दौरान सोने के परमाणु केंद्रक तैयार किए थे। 2025 में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, 2015 से 2018 के बीच प्रयोगों में लगभग 29 पिकोग्राम सोना बनने का अनुमान था। यह मात्रा इतनी कम थी कि उसका व्यावसायिक उपयोग संभव नहीं था। <Cite refs={[“turn930455search0″,”turn930455search7”]}/>
मैराथन फ्यूजन का दावा है कि उसकी उत्पादन दर CERN के बताए गए रिकॉर्ड से 10 गुना अधिक रही। हालांकि, दोनों प्रयोगों की तुलना करने के लिए एक समान मापदंड और विस्तृत आंकड़ों की जरूरत है। केवल अधिक उत्पादन दर का दावा यह साबित नहीं करता कि तकनीक से बड़ी मात्रा में सोना कम लागत पर बनाया जा सकता है।
क्या लैब में बना सोना बाजार में सस्ता बिकेगा?
फिलहाल इसकी संभावना पर कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसके पीछे कुछ बड़ी चुनौतियां हैं:
- लागत: न्यूक्लियर तकनीक और फ्यूजन उपकरणों को विकसित करना बेहद महंगा है।
- उत्पादन: प्रयोग में सोना बनने और हर साल बड़ी मात्रा में सोना तैयार करने में बहुत अंतर है।
- शुद्धता और सुरक्षा: तैयार सामग्री में मौजूद दूसरे समस्थानिकों और संभावित रेडियोधर्मी पदार्थों की जांच व प्रबंधन जरूरी होगा।
- व्यावसायिक व्यवहार्यता: यह साबित करना होगा कि सोने को तैयार करने और शुद्ध करने की कुल लागत उसके बाजार मूल्य के मुकाबले प्रतिस्पर्धी हो सकती है।
कंपनी ने अपने पहले के तकनीकी अनुमान में एक गीगावाट तापीय क्षमता वाले संभावित फ्यूजन संयंत्र से सालाना करीब दो टन सोना बनने का अनुमान दिया था। लेकिन यह अनुमानित उत्पादन है, किसी चालू व्यावसायिक संयंत्र से प्रमाणित नतीजा नहीं। <Cite refs={[“turn930455search1″,”turn930455search5”]}/>
क्या सोना बनाने की यह तकनीक आम लोगों के लिए फायदेमंद होगी?
अगर भविष्य में इस प्रक्रिया को सुरक्षित, विश्वसनीय और कम लागत वाला बनाया जा सका, तो इसका असर सोने की आपूर्ति पर पड़ सकता है। लेकिन अभी यह कहना संभव नहीं कि इससे सोने की कीमतें घटेंगी या आम लोगों के लिए सोना खरीदना सस्ता हो जाएगा।
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि मैराथन फ्यूजन ने सोना बनाने को लेकर एक बड़ा दावा किया है, लेकिन उसकी मात्रा, शुद्धता, लागत और व्यावसायिक उपयोगिता पर अभी और प्रमाण चाहिए। प्रयोगशाला में किसी तत्व को दूसरे तत्व में बदल पाना और बाजार के लिए बड़े पैमाने पर सोना तैयार करना दो अलग-अलग उपलब्धियां हैं।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी और कंपनी के सार्वजनिक दावों के आधार पर तैयार किया गया है। प्रयोग के स्वतंत्र सत्यापन और व्यावसायिक उत्पादन से जुड़े निष्कर्ष आगे मिलने वाले वैज्ञानिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।



