
हैदराबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा एक कैदी 30 दिन की पैरोल मिलने के बाद जेल से बाहर आया और फिर वापस ही नहीं लौटा। करीब चार दशक तक वह पुलिस की पकड़ से दूर रहा और इस दौरान उसने न सिर्फ सामान्य जिंदगी जी, बल्कि सरकारी शिक्षक की नौकरी भी हासिल कर ली। इतना ही नहीं, उसे ‘बेस्ट टीचर’ का अवॉर्ड भी मिला।
मामला संडेला वीरन्ना से जुड़ा है, जिसकी उम्र अब करीब 70 वर्ष बताई जा रही है। उसे 1970 के दशक के आखिर में हत्या के एक मामले में दोषी ठहराया गया था। वर्ष 1983 में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। सजा शुरू होने के करीब छह महीने बाद उसे 30 दिन की पैरोल मिली, लेकिन पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद वीरन्ना जेल वापस नहीं लौटा।
चार दशक तक बदल गई पूरी जिंदगी
जेल से बाहर निकलने के बाद वीरन्ना ने महबूबाबाद जिले के डंथलापल्ली में रहना शुरू कर दिया। इसी दौरान उसने कथित तौर पर अपनी आपराधिक पहचान छिपाकर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली।
सरकारी सेवा के दौरान उसका करियर भी चलता रहा। वर्ष 2004 में उसे ‘बेस्ट टीचर’ का पुरस्कार मिला और बाद में वह वर्ष 2013 में सरकारी पद से रिटायर भी हो गया। यानी जिस व्यक्ति को उम्रकैद की सजा मिली थी, वह दशकों तक जेल से बाहर रहकर सरकारी नौकरी करता रहा।
2024 में पुलिस ने खोज निकाला
करीब 40 साल तक फरार रहने के बाद तेलंगाना जेल विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स ने महबूबाबाद पुलिस की मदद से मई 2024 में वीरन्ना को ढूंढ निकाला। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर चेर्लापल्ली सेंट्रल जेल भेज दिया गया।
पुलिस का कहना था कि पैरोल पर बाहर आने के बाद उसने जानबूझकर जेल में सरेंडर नहीं किया था और उसे तलाशने में काफी समय लगा।
पत्नी ने मेडिकल आधार पर मांगी रिहाई
वीरन्ना की पत्नी संडेला चरम्मा ने हाल ही में तेलंगाना हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मेडिकल और मानवीय आधार पर उसकी रिहाई की मांग की थी। याचिका में लंबी कैद और पिछले कुछ वर्षों से पैरोल नहीं मिलने का भी मुद्दा उठाया गया।
पत्नी ने अदालत को बताया कि वीरन्ना की उम्र अधिक है और वह कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा है। उनका कहना था कि परिवार में उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है और उसे तत्काल इलाज की जरूरत है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। सरकारी वकील ने दलील दी कि वीरन्ना पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद जानबूझकर वापस नहीं लौटा था और उसे पकड़ने के लिए पुलिस को लंबे समय तक तलाश करनी पड़ी।
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की
तेलंगाना हाई कोर्ट ने मेडिकल और मानवीय आधार पर दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि और दोषसिद्धि को छिपाकर सरकारी नौकरी हासिल करना गंभीर मामला है।
इस मामले ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा किया है कि आखिर एक उम्रकैद का दोषी करीब चार दशक तक पहचान छिपाकर सरकारी नौकरी कैसे करता रहा और उसे सरकारी सेवा के दौरान सम्मान भी कैसे मिला।



