
झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। पति ने अपनी पत्नी पर मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। उसका कहना था कि एक रात करीब 2 बजे उसने पत्नी को काजल और लिपस्टिक लगाते हुए देखा, जिसके बाद उसे पत्नी के व्यवहार पर शक हुआ।
अदालत ने साफ कहा कि देर रात मेकअप करना या सजना-संवरना अपने आप में मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं हो सकता। किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार बताने के लिए ठोस मेडिकल साक्ष्य जरूरी हैं।
रात 2 बजे मेकअप करते देख पति को हुआ शक
मामला साल 2015 में हुई शादी से जुड़ा है। पति के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद एक रात करीब 2 बजे उसकी नींद खुली। उसने देखा कि उसकी पत्नी अलमारी के सामने खड़ी होकर काजल और लिपस्टिक लगा रही थी।
पति का दावा था कि पत्नी के इस व्यवहार से वह घबरा गया और उसे लगा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। उसने यह भी आरोप लगाया कि शादी से पहले पत्नी की कथित बीमारी की जानकारी उससे छिपाई गई थी। इसी आधार पर उसने तलाक की मांग की।
कोर्ट ने कहा- मेडिकल सबूत कहां हैं?
मामला जब अदालत पहुंचा तो पति यह दावा करता रहा कि पत्नी का इलाज कई अस्पतालों में कराया गया था। लेकिन सुनवाई के दौरान वह किसी डॉक्टर की रिपोर्ट, पर्ची या अन्य मेडिकल रिकॉर्ड



