
लखनऊ, अमृत विचार : सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क विकसित करने की योजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी के बाद शुरुआती 60 मिनट यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में मरीज को जरूरी उपचार उपलब्ध कराना है।
अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अमित घोष के मुताबिक, इस व्यवस्था से हर साल 10 से 12 हजार लोगों की जान बचाने का लक्ष्य रखा गया है। यूपीटीईएन के माध्यम से प्रदेश में संचालित ट्रॉमा, बर्न, कार्डियक, स्ट्रोक समेत अन्य इमरजेंसी सेवाओं को एकीकृत नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
योजना के तहत प्रदेश में 173 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन यूनिट विकसित की जाएंगी। इनमें 11 लेवल1 एपेक्स हब, 36 लेवल2 रीजनल सेंटर और 126 लेवल3 जिला स्तरीय इकाइयां शामिल होंगी। इससे गंभीर मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार सही अस्पताल और विशेषज्ञ सेवा तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
1200 ALS एंबुलेंस बनेंगी चलतेफिरते इमरजेंसी सेंटर
नेटवर्क में 1200 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस को भी शामिल करने का प्रस्ताव है। इन्हें केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का माध्यम न मानकर चलतेफिरते आपात उपचार केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। वहीं, प्रदेश में स्थापित होने वाले 18 मंडलीय कमांड सेंटर इमरजेंसी कॉल, एंबुलेंस, अस्पतालों में उपलब्ध बेड और विशेषज्ञ सेवाओं के बीच समन्वय स्थापित करेंगे। इससे मरीज को घटनास्थल से अस्पताल तक उपचार की निर्बाध व्यवस्था उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
रिस्पांस टाइम 50 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य के मुताबिक, नई व्यवस्था से आपातकालीन प्रतिक्रिया समय में 30 से 50 फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य है। अस्पताल पहुंचने से पहले ही महत्वपूर्ण चिकित्सकीय निर्णय लिए जा सकें, इसके लिए करीब 10 मिनट का अतिरिक्त समय हासिल करने की योजना है। इसके लिए रियलटाइम नेटवर्किंग, डिजिटल अलर्ट सिस्टम और एआई आधारित ट्रायेज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल प्रस्तावित है। पूरी व्यवस्था का आधार होगा—‘राइट मरीज, राइट डिपार्टमेंट और राइट टाइम।’
तीन स्तर पर तैयार होगा फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क
यूपीटीईएन के तहत तीन स्तर का फर्स्ट रिस्पॉन्डर नेटवर्क भी विकसित किया जाएगा। पहले स्तर में पुलिस, एंबुलेंस चालक, फायर सर्विस और हाईवे पेट्रोल जैसे तत्काल मदद पहुंचाने वाले लोग शामिल होंगे। दूसरे स्तर पर पुलिस, होमगार्ड और अन्य संस्थागत रिस्पॉन्डर होंगे, जबकि तीसरे स्तर पर प्रशिक्षित आम नागरिकों को जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य दुर्घटना या इमरजेंसी की सूचना मिलने के बाद शुरुआती समय में ही मरीज को आवश्यक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराना है।
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