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​UP International Trade Show 2026: मिट्टी की कला अब पहुंचेगी ग्लोबल बाजार तक! गोरखपुर का टेराकोटा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बिखेरेगा चमक

​UP International Trade Show 2026: मिट्टी की कला अब पहुंचेगी ग्लोबल बाजार तक! गोरखपुर का टेराकोटा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में बिखेरेगा चमक

गोरखपुर: गोरखपुर की पहचान से जुड़े पारंपरिक माटी शिल्प टेराकोटा को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच मिलने जा रहा है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के चार विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के जरिए स्थानीय टेराकोटा शिल्पकारों और कारोबारियों को देशविदेश के खरीदारों, निर्यातकों और बड़े व्यापारिक समूहों से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे टेराकोटा उत्पादों की ब्रांडिंग के साथसाथ इनके निर्यात के लिए नए बाजार मिलने की उम्मीद है।

चार स्टॉल पर दिखेगा गोरखपुर का माटी हुनर

इस बार यूपीआईटीएस में गोरखपुर के टेराकोटा उत्पाद आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगे। उद्योग विभाग ने स्टॉल लगाने के लिए चार शिल्पकारों और कारोबारियों का चयन किया है।

इनमें मेसर्स अतरंगी कलाकारी के बैनर तले टेराकोटा ज्वेलरी और होम डेकोरेशन उत्पाद तैयार करने वाली दीपिका सिंह, रीतिका कृतिका क्रिएशन की सुनीता मौर्या, गिफ्ट सिटी से कमलेश तिवारी और मेसर्स रोशनी एक उम्मीद ट्रस्ट की कोमल मद्देशिया शामिल हैं।

ट्रेड शो में विदेशी प्रतिनिधियों और बड़े कॉरपोरेट खरीदारों के सामने इन उत्पादों की सीधी प्रस्तुति होगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोरखपुर के टेराकोटा की पहुंच बढ़ने और निर्यात की संभावनाएं मजबूत होने की उम्मीद है।

ODOP से टेराकोटा को मिला नया बाजार

गोरखपुर के भटहट ब्लॉक स्थित औरंगाबाद गांव को टेराकोटा शिल्प का मूल गांव माना जाता है। औरंगाबाद और आसपास के गांवों में कई पीढ़ियों से परिवार मिट्टी से आकर्षक कलाकृतियां और उपयोगी उत्पाद तैयार करते आ रहे हैं।

वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की थी। इसी के तहत टेराकोटा को गोरखपुर का ओडीओपी उत्पाद घोषित किया गया। योजना के माध्यम से शिल्पकारों को विद्युत चालित चाक, पगमिल और अनुदान पर ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

परंपरा के साथ जुड़ रही आधुनिक डिजाइनिंग

सुविधाओं और बाजार के विस्तार से टेराकोटा के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई। साथ ही सरकार की ओर से विभिन्न बड़े मंचों पर इसकी ब्रांडिंग किए जाने से उत्पादों की मांग भी बढ़ी।

कारोबार में वृद्धि का असर शिल्पकारों के जीवन स्तर पर भी देखने को मिला है। पहले कच्ची झोपड़ियों में काम करने वाले कई कारीगर अब पक्के वर्कशॉप और मकान बना चुके हैं।

खास बात यह है कि नई पीढ़ी भी अब इस पारंपरिक काम से जुड़ रही है। जो युवा कभी मिट्टी के पुश्तैनी कारोबार से दूरी बना रहे थे, वे आधुनिक डिजाइनिंग सीखकर परिवार के कारोबार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

‘सही बाजार मिले तो मिट्टी भी सोना उगल सकती है’

उद्योग उपायुक्त उज्ज्वल सिंह के अनुसार, यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगाए जाने वाले टेराकोटा स्टॉल सिर्फ गोरखपुर के शिल्पकारों के हुनर को प्रदर्शित करने का माध्यम नहीं होंगे, बल्कि यह भी दिखाएंगे कि पारंपरिक कला को सही नीति, तकनीक और बाजार का सहयोग मिले तो वह आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकती है।

उनके मुताबिक, यूपीआईटीएस में मिलने वाला अंतरराष्ट्रीय मंच गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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