UPI Charges New Rule: केंद्र सरकार के जरिए ₹2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगने वाला नया एमडीआर चार्ज 0.4% का नियम लागू करने के निर्देश दिए गए थे। यह नियम 15 अक्टूबर से लागू होने वाले थे। लेकिन अब UPI पर लगने वाला नया एमडीआर चार्ज के नियम को टला जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि सरकार त्योहार के सीजन आने की वजह से इस नियम को लागू करने की डेट बढ़ा सकती है, जिससे किसी भी व्यापारी को त्योहार के सीजन में UPI पर लगने वाला नया एमडीआर चार्ज न देना पड़े।
कब से होना है नियम लागू?
केंद्र सरकार के जरिए लागू किए गए UPI पेमेंट पर लगने वाला नया एमडीआर चार्ज 0.4% का नियम 15 अक्टूबर से लागू होना था लेकिन फिलहाल इस डेट को बढ़ाने पर विचार विमर्श चल रहा है।
सूत्रो के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने व्यापारियों और फिनटेक कंपनियों के विरोध और फेस्टिव सीजन को देखते हुए 9 अक्टूबर 2026 को UPI स्टीयरिंग कमेटी की अहम बैठक बुलाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 अक्टूबर से लगने वाले 0.4% के MDR चार्ज को 1 जनवरी 2027 तक के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है।
क्या है नया UPI MDR चार्ज?
नए नियम के अनुसार, अगर कोई ग्राहक किसी दुकानदार को 2,000 रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करता है, तो उस पर 0.4% का MDR चार्ज लगेगा।
वहीं अगर कोई 75,000 रुपए या उससे ज्यादा का ट्रांजैक्शन करता है, तो यह चार्ज अधिकतम 300 रुपए ही लगेगा। खास बात यह है कि छोटे दुकानदारों और आम लोगों के बीच होने वाले पेमेंट पर कोई एक्स्ट्रा mdr चार्ज नहीं लगेगा। यह पहले की तरह जीरो MDR पर चलता रहेगा।
UPI पेमेंट पर MDR चार्ज पर चल रहा केस
2000 रुपये से ज्यादा के कुछ पर्सनटूमर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस नए नियम पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान बेंच ने सरकार और RBI से कई अहम सवाल पूछे।
सरकार और RBI समेत 4 पक्षों से जवाब मांगा
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने केंद्र सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया , नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी किया है। इन सभी से 4 हफ्ते के अंदर जवाब मांगा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा टैक्स है या फीस ?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सरकार से सीधा सवाल किया कि यह टैक्स है या फीस। कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर इसे फीस नहीं माना जाता, तो रकम वसूलने का कानूनी आधार क्या है और इसके बदले कौनसी सेवा दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कानूनी पहलू के साथ तकनीकी पक्ष भी है।
सरकार बोली 96% ट्रांजैक्शन पर चार्ज नहीं
केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG एन. वेंकटरमन ने बताया था कि नया चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होना है। उन्होंने कहा कि करीब 96 फीसदी UPI ट्रांजैक्शन इस चार्ज के दायरे में नहीं आएंगे। जरूरी सेवाओं के लिए चार्ज की अधिकतम सीमा 5 रुपये रखी गई है। उन्होंने साफ कहा कि यह टैक्स या सरकारी फीस नहीं है।
फिलहाल इस नियम को लागू करने पर विचार विमर्श जारी है। 15 अक्टूबर को लागू होने वाला नियम टाला जा सकता है।



