US Fed Rate Hike: अमेरिका के केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व ने एक बड़ा फैसला लिया है. साल 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गई है. फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने अपनी दो दिन की अहम बैठक के बाद इसका ऐलान किया. बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा किया गया है. इसके साथ ही अब ब्याज दरें 3.75% से 4.00% की रेंज में आ गई हैं.

ये कदम अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इस साल जनवरी से ही ब्याज दरों में कोई भी बदलाव नहीं किया गया था. केंद्रीय बैंक अब तक अर्थव्यवस्था पर महंगे कच्चे तेल, नए टैरिफ नियमों के असर का आकलन कर रहा था.
महंगाई बनी दरें बढ़ाने की मुख्य वजह
फेडरल रिजर्व का ये फैसला अचानक नहीं आया है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लगातार बढ़ रही महंगाई है. अगस्त महीने में अमेरिका में कंज्यूमर इन्फ्लेशन 3.4% पर बना रहा. ये आंकड़े पिछले महीने के बराबर ही थे, लेकिन फेडरल रिजर्व के 2% के तय लक्ष्य से काफी ज्यादा हैं.
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में एनर्जी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बूम ने भी बाजार में मांग को तेजी से बढ़ा दिया है. इन सभी वजहों ने महंगाई को कम नहीं होने दिया. जुलाई में हुई बैठक में ही कुछ सदस्यों ने ब्याज दरें बढ़ाने की वकालत की थी. अब ताजा आंकड़ों ने दरें बढ़ाने के इस फैसले पर मुहर लगा दी.
नए फेड चीफ केविन वॉर्श का कड़ा फैसला
ब्याज दरों में ये बढ़ोतरी फेड के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श के लिए एक बड़ा टेस्ट है. उन्होंने इसी साल केंद्रीय बैंक की कमान संभाली है. वॉर्श ने पहले ब्याज दरों को लेकर कोई साफ संकेत नहीं दिए थे. हालांकि उन्होंने ये जरूर कहा था कि अगर महंगाई कम नहीं हुई, तो कड़े कदम उठाए जाएंगे. अब उन्होंने इस फैसले से अपने बयान को सच साबित कर दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप की उम्मीदों को झटका
इस फैसले से अमेरिका की राजनीति में भी हलचल तेज हो सकती है. ये कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इच्छा के बिल्कुल उलट है. ट्रंप ने केविन वॉर्श को इस उम्मीद के साथ नियुक्त किया था कि वो ब्याज दरों को कम रखेंगे. ट्रंप लगातार मांग कर रहे थे कि उधारी सस्ती होनी चाहिए ताकि देश के आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिल सके. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही थी. महंगाई ने केंद्रीय बैंक के पास दरें घटाने का कोई विकल्प ही नहीं छोड़ा.



