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​क्या है सॉवरेन इम्युनिटी, जिसकी दलील के सहारे मादुरो चाहते हैं ड्रग तस्करी केस से छुटकारा?

वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस अमेरिका में गंभीर ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना कर रहे हैं. दोनों ने अमेरिकी अदालत से केस खारिज करने की मांग की है. उनके वकीलों ने सॉवरेन इम्युनिटी और हेड ऑफ स्टेट इम्युनिटी का हवाला दिया है. इसका मतलब है कि किसी देश के मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष को दूसरे देश की अदालत में मुकदमे से कुछ कानूनी सुरक्षा मिल सकती है. मादुरो के वकीलों का तर्क है कि जिस समय आरोप लगाए गए, उस समय मादुरो को वेनेजुएला अपना राष्ट्रपति मानता था. इसलिए किसी विदेशी अदालत को उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

​क्या है सॉवरेन इम्युनिटी, जिसकी दलील के सहारे मादुरो चाहते हैं ड्रग तस्करी केस से छुटकारा?

हालांकि, यह मामला केवल एक कानूनी दलील से तय नहीं होगा. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि आखिर क्या है सॉवरेन इम्युनिटी, जिसकी दलील के सहारे मादुरो अमेरिका की अदालती प्रक्रिया से बचना चाहते हैं? क्या है राष्ट्राध्यक्षों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा?

मादुरो पर क्या आरोप हैं?

अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि मादुरो ने वेनेजुएला के अधिकारियों और ड्रग तस्करों के साथ मिलकर अमेरिका में बहुत बड़ी मात्रा में कोकीन भेजा. अमेरिका का आरोप है कि मादुरो ने अपने राजनीतिक और सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल किया. इससे ड्रग तस्करी के नेटवर्क को मदद मिली. मादुरो और उनकी पत्नी ने आरोपों से इनकार किया है. दोनों ने खुद को निर्दोष बताया है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला कई साल पहले दर्ज किया गया था. अब मादुरो और फ्लोरेस अमेरिका की हिरासत में हैं.

दोनों पर दोष साबित होने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क की मैनहट्टन संघीय अदालत में हो रही है. अदालत ने इम्युनिटी से जुड़ी दलीलों पर मौखिक बहस के लिए 17 नवंबर की तारीख तय की है. मुकदमा अगले साल 1 जून से शुरू होने की संभावना है. यह जानकारी अमेरिकी अदालत में दाखिल दस्तावेजों और समाचार रिपोर्टों पर आधारित है.

निकोलस मादुरो अमेरिका में गंभीर ड्रग तस्करी के आरोपों का सामना कर रहे हैं.

क्या है सॉवरेन इम्युनिटी?

सॉवरेन इम्युनिटी का आधार एक पुराना अंतरराष्ट्रीय सिद्धांत है. इस सिद्धांत के अनुसार, एक संप्रभु देश को दूसरे देश की अदालतों के सामने सामान्य रूप से जवाबदेह नहीं बनाया जा सकता. कोई देश दूसरे देश की सरकार के खिलाफ आसानी से मुकदमा नहीं चला सकता. इसके पीछे एक विचार है. सभी संप्रभु देश कानूनी रूप से बराबर हैं. इसलिए एक देश की अदालत को दूसरे देश की सरकार पर अधिकार जताने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए.

उदाहरण के लिए, किसी देश की सरकारी संपत्ति, सैन्य गतिविधि या आधिकारिक फैसले पर दूसरे देश की अदालत सीधे दखल नहीं दे सकती. हालांकि, यह सुरक्षा हर स्थिति में लागू नहीं होती. कई देशों में व्यावसायिक गतिविधियों और निजी कामों को इम्युनिटी से बाहर रखा जाता है. यानी कोई सरकार व्यापारिक समझौता करे और विवाद पैदा हो, तो कुछ परिस्थितियों में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव हो सकती है.

हेड ऑफ स्टेट इम्युनिटी क्या होती है?

हेड ऑफ स्टेट इम्युनिटी राष्ट्राध्यक्ष को मिलने वाली व्यक्तिगत कानूनी सुरक्षा है. यह सुरक्षा आम तौर पर मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री या किसी अन्य शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी से जुड़ी होती है. इसका उद्देश्य किसी नेता को व्यक्तिगत लाभ देना नहीं है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक देश दूसरे देश की सरकार को अदालतों के जरिए लगातार दबाव में न डाल सके. मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष को विदेश में गिरफ्तारी या आपराधिक मुकदमे से विशेष सुरक्षा मिल सकती है. यह सुरक्षा उनके पद और अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़ी होती है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि राष्ट्राध्यक्ष हर अपराध से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है. इम्युनिटी की प्रकृति, आरोपी का पद और आरोपों का समय महत्वपूर्ण होते हैं.

पद छोड़ने के बाद क्या होता है?

राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटने के बाद स्थिति बदल सकती है. पद पर रहते हुए मिलने वाली व्यक्तिगत सुरक्षा को अक्सर पर्सनल इम्युनिटी कहा जाता है. यह सुरक्षा पद की अवधि से जुड़ी होती है. पद छोड़ने के बाद यह सुरक्षा कमजोर या समाप्त हो सकती है. इसके बाद अदालत यह देख सकती है कि कथित काम निजी था या आधिकारिक. अगर कोई काम राष्ट्रपति के रूप में आधिकारिक जिम्मेदारी निभाते हुए किया गया था, तो पूर्व राष्ट्राध्यक्ष कंडक्टबेस्ड इम्युनिटी यानी आचरणआधारित सुरक्षा का दावा कर सकता है. मादुरो के वकीलों ने इसी तरह की वैकल्पिक दलील भी दी है. उनका कहना है कि अगर अदालत उन्हें मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष वाली सुरक्षा नहीं देती, तब भी उनके आधिकारिक कार्यों के लिए उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए.

क्या अपने देश की मान्यता जरूरी है?

मादुरो के वकीलों ने एक अहम बात कही है. उनके अनुसार, आरोप लगाए जाने के समय वेनेजुएला मादुरो को अपना राष्ट्राध्यक्ष मानता था. यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि अमेरिकी अदालत मादुरो को राष्ट्राध्यक्ष मानती है या नहीं? अमेरिका और वेनेजुएला के बीच राजनीतिक संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं.

अमेरिका ने पहले मादुरो की वैधता पर सवाल उठाए थे. इसलिए अमेरिकी अदालत इस बात पर भी विचार कर सकती है कि मादुरो को अमेरिकी नजर में वैध राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा हासिल था या नहीं? मादुरो की कानूनी टीम का दावा है कि घरेलू मान्यता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अमेरिकी सरकार इस दलील का विरोध कर सकती है.

क्या उनकी पत्नी को भी इम्युनिटी मिल सकती है?

सिलिया फ्लोरेस ने भी सॉवरेन इम्युनिटी का दावा किया है. उनके वकीलों का कहना है कि यह सुरक्षा वेनेजुएला की संप्रभुता से जुड़ी है. इसलिए इसे केवल वेनेजुएला ही छोड़ सकता है. लेकिन प्रथम महिला का दर्जा हर देश में अपने आप कानूनी सुरक्षा नहीं देता. किसी नेता की पत्नी को राष्ट्राध्यक्ष जैसी व्यक्तिगत इम्युनिटी मिलेगी या नहीं, यह संबंधित कानून और परिस्थितियों पर निर्भर करता है. अदालत यह भी देख सकती है कि फ्लोरेस पर लगाए गए आरोप उनके पति के आधिकारिक पद से जुड़े हैं या नहीं.

गिरफ्तारी की वैधता भी बड़ा मुद्दा

मादुरो के वकील गिरफ्तारी की प्रक्रिया को भी चुनौती दे रहे हैं. अमेरिकी सुरक्षा बलों ने उन्हें कराकास से गिरफ्तार किया और अमेरिका लेकर आए. मादुरो ने इस कार्रवाई को अपहरण बताया था. अमेरिकी प्रशासन ने इसे कानून लागू करने की कार्रवाई कहा है. यहां दो अलगअलग कानूनी सवाल हैं.

पहला सवाल यह है कि मादुरो को अमेरिका लाने की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैध थी या नहीं? दूसरा सवाल है कि गिरफ्तारी में कोई कमी होने पर क्या अमेरिकी अदालत को आपराधिक आरोप खारिज कर देने चाहिए. कई बार अदालत गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, लेकिन इससे हर स्थिति में पूरा आपराधिक मामला खत्म नहीं होता. इसका फैसला मामले के तथ्यों और अमेरिकी कानून पर निर्भर करेगा.

क्या हैं सॉवरेन इम्युनिटी की सीमाएं?

सॉवरेन इम्युनिटी पूर्ण सुरक्षा नहीं है. किसी देश की सरकार खुद किसी अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार कर सकती है. इसे इम्युनिटी छोड़ना या वेवर कहा जाता है. कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौते भी इम्युनिटी की सीमा तय कर सकते हैं. कई देशों के कानून सरकारी काम और निजी काम में अंतर करते हैं. मानवाधिकार उल्लंघन, युद्ध अपराध और गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के मामलों में भी इम्युनिटी पर बहस होती रही है. हालांकि, हर मामले का नतीजा अलग होता है. किसी पुराने मामले को सीधे मादुरो के केस पर लागू नहीं किया जा सकता.

सॉवरेन इम्युनिटी का मकसद नेताओं को अपराध करने की खुली छूट देना नहीं है. इसका उद्देश्य देशों के बीच शक्ति संतुलन बनाए रखना है. मादुरो की कानूनी टीम इसी सिद्धांत का सहारा लेकर केस खत्म करवाना चाहती है. उनका कहना है कि एक विदेशी राष्ट्राध्यक्ष पर दूसरे देश की अदालत में मुकदमा नहीं चल सकता. अमेरिकी अभियोजकों का रुख इसके विपरीत है. अब अंतिम फैसला अदालत को करना है. यह निर्णय केवल मादुरो के भविष्य को प्रभावित नहीं करेगा. इससे यह भी संकेत मिलेगा कि विदेशी नेताओं को अमेरिकी अदालतों में कितनी कानूनी सुरक्षा मिल सकती है.

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