Murasu Cyclone: बंगाल की खाड़ी से उठे अर्नब के बाद अब दूसरे चक्रवात की बारी है. भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आंध्र प्रदेश को एक और चक्रवात का सामना करना पड़ सकता है. बंगाल की खाड़ी में बन रहा डिप्रेशन चक्रवात मुरासु में बदल सकता है. यह आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ सकता है और मंगलवार को टकरा सकता है. अगर डिप्रेशन तूफान में बदलता है तो इसका नाम मुरासु होगा.

मुरासु नाम भारत की ओर से दिया गया है. IMD ने आने वाले दिनों में आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और ओडिशा के कुछ हिस्सों में तेज हवाएं चलने और भारी से बहुत ज्यादा बारिश होने का अनुमान लगाया है. तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी गई है. IMD के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्रा के अनुसार, इस सिस्टम से लगातार 80 से 90 kmph की रफ्तार से हवा चल सकती है. हवा के झोंके 100 kmph तक पहुंच सकते हैं.
दावा किया गया है कि मुरासु के साइक्लोन अर्नब से कम तेज होने की उम्मीद है. अर्नब ने लगभग 130 kmph की रफ्तार से आंध्र प्रदेश में तबाही मचाई थी.
क्या है मुरासु नाम का मतलब?
भारत की तरफ से दिए गए इस तूफान का नाम तमिल भाषा से लिया गया है. तमिल भाषा में इसका अर्थ ‘ढोल’ होता है. मुरासु एक प्राचीन वाद्य यंत्र यानी ढोल को कहा जाता है. यह नाम भारत ने सुझाया था. पुराने समय में इस ताल वाद्य का इस्तेमाल लोगों तक सूचना पहुंचाने और प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चेतावनी देने के लिए किया जाता था. इसी वजह से इस नाम को चुना गया.
अर्नब चक्रवात ने सबसे ज्यादा तबाही आंध्र प्रदेश ने मचाई. फोटो: PTI
कैसे रखे जाते हैं चक्रवातों के नाम?
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग के उष्णकटिबंधीय चक्रवात पैनल द्वारा तय किए जाते हैं। इस पैनल में शामिल देश अपनी ओर से नाम सुझाते हैं.
नामकरण की यह व्यवस्था 2004 में शुरू हुई थी. समय के साथ जैसेजैसे ज्यादा देश पैनल से जुड़े, नामों की सूची बढ़ती गई. WMO के कुल 194 सदस्य हैं, जिनमें 188 सदस्य देश और 6 क्षेत्र शामिल हैं. भारत में क्षेत्रीय मौसम केंद्र नाम सुझाते हैं और आम लोगों की ओर से दिए गए नाम भी सूची में शामिल किए गए हैं.
मुरासु चक्रवात मंगलवार को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है. फोटो: PTI
नामकरण के नियम क्या हैं?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर 2004 में यह व्यवस्था इसलिए शुरू की गई ताकि हर चक्रवात की पहचान आसान हो, उसे याद रखा जा सके और बड़ी आबादी तक चेतावनी जल्दी पहुंचाई जा सके. नाम चुनने के बुनियादी मापदंड ये हैं
- नाम छोटा हो और अधिकतम आठ अक्षरों का हो.
- नाम राजनीतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं के प्रति तटस्थ हो.
- एक बार इस्तेमाल हुआ नाम दोबारा नहीं दोहराया जाता.
मुरासु चक्रवात का अलर्ट जारी किया गया है.
मौसम विभाग का अलर्ट क्या कहता है?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, चक्रवात की स्थिति में अलर्ट रहने की जरूरत है.
- आंध्र प्रदेश: तटीय आंध्र और रायलसीमा के कुछ हिस्सों में अगले दो से तीन दिनों तक मध्यम से भारी बारिश की आशंका है.
- तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल: भारी बारिश का पूर्वानुमान है.
- केरल और माहे: यहां भी भारी बारिश हो सकती है.
- समुद्र की स्थिति: आंध्र प्रदेश तट के पास समुद्र के उग्र रहने की चेतावनी जारी की गई है.
- हवा की रफ्तार: 2 और 3 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश में 8090 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जबकि झोंकों की गति 100 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.



