बच्चे को कम उम्र से ही गुड और बैड टच समझाना बहुत जरूरी है. इसी के साथ उन्हें ये भी बताएं कि अजनबी ही नहीं बल्कि आपके परिवार या रिश्ते में भी कोई क्यों न हो वो गलत तरह से नहीं छू सकता है. इसी के साथ पेरेंट्स को भी चाहिए कि वह अपने बच्चे की बताई बातों को गौर से सुनें और सही कदम उठाएं.
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आज के समय में बच्चों की सेफ्टी भी चिंता वाली बात है. हर वक्त बच्चे पर नजर रख पाना संभव नहीं होता है. ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे को कुछ चीजें जरूर सिखाएं, जैसे उसे निजी जानकारियां याद कराएं. बच्चे को घर के दो से तीन फोन नंबर्स याद होने चाहिए. इसके अलावा उन्हें घर का एड्रेस, पास की दुकानों के नाम, मातापिता फैमिली मेंबर्स के नाम जैसी चीजों को याद करवाएं.
बच्चों को अजनबियों से दूर रहना सिखाएं. फिर चाहे वो बाहर गए हो या फिर घर पर हो. जैसे कोई चॉकलेट, टॉफी या गिफ्ट का बहाना दें तो उनके साथ न जाएं. ऐसा कुछ भी हो तो आप जब घर पर मातापिता न हो तो किसी के लिए दरवाजा न खोलें.
बच्चे को साथ बाहर लेकर जाएं तो उन्हें बताएं कि हाथ न छोंड़ें, पेरेंट्स के साथ ही रहना सेफ है और अगर वो अलग हो जाएं तो किन जगहों से मदद मांग सकते हैं और किनसे दूर रहना चाहिए. अगर पेरेंट्स से भीड़ में अलग हो गए हैं तो घबराकर रोएं नहीं बल्कि एक सेफ जगह पर जाकर खड़े हो जाएं. ऐसे में बच्चा अचानक आई सिचुएशन को हैंडल करने के लिए मेंटली तैयार रहेगा.
बच्चे को रोड सेफ्टी रूल्स भी सिखाने बहुत जरूरी होता है. कई बार बच्चे स्कूल से वापस आ रहे होते हैं या कहीं बाहर कुछ सामान खरीदने, पार्क में खेलने जाते हैं तो उन्हें पता होना चाहिए कि कैसे गाड़ियों से बचकर चलना है. जैसे सड़क पर पैदल हमेशा फुटपाथ पर चलें, हमेशा जेब्रा क्रॉसिंग या सिग्नल से ही रोड क्रॉस करें. ट्रैफिक लाइट्स के रूल बताएं और सड़क पर कभी दौड़े नहीं.



