प्रदूषण की मार झेलने वाला पाकिस्तान में अब LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस की किल्लत से जूझ रहा है. पाकिस्तान में कतर से आने वाली LNG की सप्लाई प्रभावित हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2025 से मार्च 2026 के बीच आयातित LNG देश की कुल गैस खपत का करीब पांचवां हिस्सा थी. अब इसकी सप्लाई बाधित होने से बिजली कटौती और सर्दियों से पहले गैस का संकट बढ़ गया है. जानिए, दुनिया में LNG का सबसे बड़ा सप्लायर कौन है.

दुनिया में लिक्विफाइड नेचुरल गैस के निर्यात की सबसे ज्यादा क्षमता अमेरिका के पास है. ग्लोबल एनर्जी मॉनिटर के सितंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की क्षमता 102.3 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है. यह किसी भी दूसरे देश से काफी ज्यादा है.
टॉप3 देशों का दबदबा
Statista की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के बाद ऑस्ट्रेलिया 81.8 मिलियन टन और कतर 77.1 मिलियन टन की क्षमता के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. अमेरिका की क्षमता कतर से करीब 25 मिलियन टन ज्यादा है. तीनों देशों की क्षमता मिलाकर करीब 261 मिलियन टन बैठती है, जो टॉप10 देशों की कुल क्षमता का लगभग 62 प्रतिशत है.
LNG के उत्पादन और निर्यात में अमेरिका आगे है. फोटो: Pexels
चौथे स्थान पर रूस है, जिसकी क्षमता 36.6 मिलियन टन है, यानी कतर के आधे से भी कम. वहीं, पांचवे पर मलेशिया , छठे पर अल्जीरिया , सातवें पर नाइजीरिया , आठवें पर इंडोनेशिया , नौवें पर मिस्र और दसवें पर त्रिनिदाद और टोबैगो है.
क्षमता और असल निर्यात में फर्क समझें
यहां एक बात समझना जरूरी है. ये आंकड़े चालू निर्यात क्षमता के हैं, यानी प्लांट सालभर में अधिकतम कितनी LNG बना सकते हैं. असल निर्यात इससे कम या ज्यादा हो सकता है. फिर भी निर्यात के मामले में तस्वीर कुछ अलग नहीं है. अमेरिका 2023 में पहली बार दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक बना था, जब उसने 9.12 करोड़ मीट्रिक टन LNG निर्यात की. ऑस्ट्रेलिया और कतर को पीछे छोड़ा. ट्रैकर कंपनी Kpler के ताजा आंकड़े भी बताते हैं कि अमेरिका कतर और ऑस्ट्रेलिया से आगे शीर्ष निर्यातक है.
कतर पर संकट का साया
कतर इस साल मुश्किल में है. 2 मार्च 2026 को ईरान ने कतर के सबसे बड़े LNG उत्पादन केंद्र रास लफान पर हमला किया. होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाला कतर और UAE का LNG एक्सपोर्ट भी गंभीर रूप से प्रभावित है.
इसका असर कतर पर निर्भर देशों पर साफ दिख रहा है. पाकिस्तान इसका बड़ा उदाहरण है. पिछले साल उसने अपना 99 प्रतिशत LNG आयात कतर से लॉन्गटर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत मंगाया था. सप्लाई रुकी तो उसे महंगी स्पॉट खरीद का रुख करना पड़ा और बिजली व गैस संकट गहरा गया.
वैश्विक LNG बाजार कुछ ही देशों के हाथ में है. इसलिए किसी एक बड़े सप्लायर में रुकावट आने पर पूरी दुनिया में कीमतों और आपूर्ति पर असर पड़ता है. अमेरिका की बढ़ती क्षमता खरीदार देशों को एक अतिरिक्त विकल्प देती है, लेकिन संकट के समय वही देश सुरक्षित रहते हैं जिनके पास एक से ज्यादा सप्लायर होते हैं.



