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​7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग, BRICS में होंगे शामिल; इतिहास के पन्नों में क्यों खास है यात्रा?

​7 साल बाद भारत आ रहे शी जिनपिंग,  BRICS में होंगे शामिल; इतिहास के पन्नों में क्यों खास है यात्रा?

भारत में 12 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। जिसको लेकर दिल्ली में तैयारियां तेजी से हो रही है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े इंतजाम किये गये है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए जाएंगे। सरकारी मीडिया ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो सहित कई प्रमुख नेताओं के महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। 

महत्वपूर्ण समय में हो रही ये यात्रा 

शी की यह यात्रा दोनों एशियाई देशों के बीच संबंधों को स्थिर करने के जारी प्रयासों और वैश्विक स्तर पर उथलपुथल की स्थिति, खासकर पश्चिम एशिया संघर्ष और रूसयूक्रेन युद्ध के बीच ब्रिक्स सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम मानी जा रही है। 

कबकब भारत आ चुके है शी 

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि राष्ट्रपति शी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत जाएंगे। शी की यह यात्रा करीब सात साल बाद भारत की पहली यात्रा होगी। इससे पहले 2019 में शी ने चेन्नई के पास मामल्लपुरम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए भारत का दौरा किया था। इससे पहले वह 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए थे। उन्होंने सितंबर 2014 में पहली बार भारत की यात्रा की थी, जब उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ व्यापक बातचीत की थी। 

यह यात्रा दोनों नेताओं के अपनेअपने कार्यकाल की शुरुआत के दौरान हुई थी। इसके बाद शी ने 2016 में गोवा में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फिर भारत का दौरा किया था।

भारत ने साल 2012 में पहली बार की थी मेजबानी 

इससे पहले भारत ने पहली बार 2012 में दिल्ली में शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी और उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ब्रिक्स विकास बैंक बनाने का विचार रखा था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद ब्रिक ‘ब्रिक्स’ बन गया। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने, जबकि एक साल बाद इंडोनेशिया इसमें शामिल हुआ। 

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पहल पर बना था ब्रिक्स 

पहला ‘ब्रिक शिखर सम्मेलन’ जून 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में हुआ था, जिसमें डॉ. मनमोहन सिंह ने भाग लिया था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पहल पर सितंबर 2006 में इस समूह के चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में मुलाकात की थी और आपस में विभिन्न प्रकार के संपर्क एवं सहयोग विकसित करने का निर्णय लिया था। 

शंघाई में मुख्यालय 

जुलाई 2014 में यह संस्था अस्तित्व में आई और इसका मुख्यालय शंघाई में रखा गया। इसे न्यू डेवलपमेंट बैंक नाम दिया गया तथा जानेमाने बैंकर के. वी. कामथ इसके पहले अध्यक्ष बने। इसके बाद से भारत ने विभिन्न राज्यों में विकास परियोजनाओं के लिए एनडीबी से करीब 10 अरब अमेरिकी डॉलर का ऋण लिया है। 

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत

भारत की मेजबानी में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में आयोजित होगा। भारत की मेजबानी में शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले आई है। दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब रूसयूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी तथा ट्रंप प्रशासन की व्यापार एवं शुल्क नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों से वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित है।

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