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मिसाइल से मारेंगे और मानेंगे भी नहीं! UAE पर ईरान ने क्यों बदली चाल?

एक बार फिर से किसी भी वक्त जंग बहुत ज्यादा भड़क सकती है क्योंकि यूएई पर बीती रात जिस तरीके से हमले हुए जिस तरीके से फुजेरा पोर्ट की बात की जाए या फिर अबू धाबी शारजाह या फिर दुबई की क्यों ना बात की जाए वहां पर धड़ाधड़ मिसाइलें ड्रोन अटैक की खबरें आई थी। इस बीच ईरान की तरफ से भी प्रतिक्रिया। जब यूएई पर हमले हो रहे हैं और यूएई की तरफ से बकायदा अपने लोगों को ये संदेश जारी किया गया कि अलर्ट रहिए सुरक्षित स्थानों पर रहिए मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे हैं। हमारे यहां डिफेंस सिस्टम उनका जवाब दे रहे हैं। लेकिन ईरान की तरफ से जिस प्रतिक्रिया की उम्मीद थी वो नहीं दिखाई दे रही। हमले दुबई में फजरा में शारजहां तक पर हुए हैं। यूएई के इन बड़े शहरों पर हुए हैं।  ईरान ने दुबई से कह दिया है क 40 दिनों की जो जंग हुई उसमें जो पहले हमले हुए थे या जहां से स्टार्ट हुई थी वो कहां से हुई थी और वो यूएई से हुई थी। इसीलिए उन्होंने इसके जरिए ये बताने की कोशिश की है कि अगर अब भी आपने अमेरिका और इसराइल का साथ देने से परहेज नहीं किया तो हम दुबई जैसे शहर को भी उड़ा देंगे। 

मिसाइल से मारेंगे और मानेंगे भी नहीं! UAE पर ईरान ने क्यों बदली चाल?
मिसाइल से मारेंगे और मानेंगे भी नहीं! UAE पर ईरान ने क्यों बदली चाल?
इसके साथ ही कहा जा रहा है कि अमेरिका जो एक प्रोजेक्ट फ्रीडम चला रहा है होर्मुज को खुलवाने के लिए। मानो होर्मुज अमेरिका के लिए इज्जत का सवाल बन गया हो। प्रेसिडेंट ट्रंप से पत्रकार मीडिया पूछ रहा है कि क्या आपकी रणनीति क्या आप कर रहे हैं? वो बिना सवाल का जवाब दिए हुए निकल गए। अमेरिका होर्मुज में फंस गया है। अपने तरफ से तो ब्लॉकेट लगा रखा है। लेकिन ईरान ने जिस तरह से वहां पर कंट्रोल हासिल कर रखा है उसको नहीं छुड़ा पा रहा। और ईरान का एकदम स्पष्ट संदेश है कि हम हॉर्मुज को तो नहीं छोड़ेंगे। जो भी तय होगा हमारी शर्तों पर तय होगा। तो ये अमेरिका के लिए भारी बेइज्जती की बात है।  हालांकि बारबार कहा जा रहा था यूएई की तरफ से उनके एयर डिफेंस सिस्टम जवाब दे रहे हैं। लोगों को कहा जा रहा था सुरक्षित स्थानों पर रहिए। और इसके अलावा अगर  ट्रंप की तरफ से एक बयान आया था। इसी बयान के बाद ये सब कुछ शुरू हुआ था।

ईरान की तरफ से जवाब आया कि जिस जिन सात जहाजों की बात की जा रही है असल में वो आम लोगों की थी यानी सेना से जुड़ी हुई नहीं थी उसमें उन्होंने उनको निशाना बना दिया। भारत की तरफ से इसको लेकर बारबार ये कहा जा रहा है कि डायलॉग से बात कीजिए। डिप्लोमेसी से समाधान होगा। 

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