पश्चिम बंगाल में मचे राजनीतिक घमासान के बाद बारी अब महाराष्ट्र की लग रही है. यहां पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना में एक और बड़े फूट के कयास लगाए जाने लगे हैं. फूट को रोकने के लिए शिवसेना ने दिल्ली में आज गुरुवार को पार्टी की संसदीय दल अहम बैठक बुलाई, लेकिन 6 बागी सांसद आए ही नहीं. इसके बाद सांसद अरविंद सावंत ने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी. प्रवक्ता संजय राउत ने भी कहा कि बागियों को सबक सिखाने की जरूरत है.

दरअसल, इस बैठक के लिए शिवसेना की ओर से व्हिप जारी कर दी गई थी. पार्टी इसी का हवाला देते हुए अब एक्शन लेने की बात कर रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि व्हिप को लेकर क्या नियम है और क्या यह पार्टी की बैठकों में भी लागू होता है?
संसद या विधानसभा के लिए व्हिप
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक व्हिप केवल विधानसभा या संसद के सदन के भीतर ही लागू होता है, पार्टी की आंतरिक बैठकों पर नहीं.
यदि विधानसभा या संसद में किसी विधेयक, प्रस्ताव या विश्वास मत पर वोट होना है और पार्टी ने अपने सांसदों या विधायकों को किसी विशेष तरीके से मतदान करने या उपस्थित रहने का निर्देश दिया है, तो उसका पालन करना अनिवार्य होता है. व्हिप का उल्लंघन करने पर दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता भी जा सकती है.
पार्टी की आंतरिक बैठकों में नियम
यदि किसी पार्टी ने अपने सांसदों या विधायकों को किसी होटल, ऑफिस या अन्य स्थान पर आयोजित पार्टी बैठक में उपस्थित रहने का निर्देश दिया और कोई सदस्य वहां नहीं पहुंचा, तो केवल इस आधार पर उसकी सांसद या विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं की जा सकती.
पार्टी क्या कार्रवाई कर सकती है?
पार्टी ऐसे सदस्य या सदस्यों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई कर सकती है. पार्टी उसे पद से हटा सकती है या पार्टी से निष्कासित कर सकती है. लेकिन केवल बैठक में अनुपस्थित रहने के कारण उसकी सांसद या विधायक की सदस्यता नहीं छीनी जा सकती.
क्या है इस मामले में कानूनी स्थिति
दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्रवाई तभी संभव है, जब सदन के भीतर मतदान या सदन की कार्यवाही से जुड़े व्हिप का उल्लंघन हुआ हो. पार्टी की आंतरिक बैठकों में अनुपस्थिति इसके दायरे में नहीं आती. सुप्रीम कोर्ट भी अलगअलग मामलों में यही सिद्धांत स्पष्ट कर चुका है.
कहा जा रहा है कि अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे उद्धव ठाकरे गुट के साथ खड़े हैं, तो शेष अन्य 6 सांसद संजय देशमुख, संजय पाटिल, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, नागेश पाटिलआष्टीकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय जाधव बागी खेमे में हैं. अगर बागी गुट का एक भी सांसद इस बैठक में शामिल हो गया तो उस गुट को अलग दल की मान्यता मिलने में दिक्कत हो सकती है.



