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प्रचंड मोदी लहर में भी नहीं हारे उमाशंकर सिंह, जानिए कौन थे बसपा के ‘इकलौते विधायक’, निधन से बलिया में शोक

प्रचंड मोदी लहर में भी नहीं हारे उमाशंकर सिंह, जानिए कौन थे बसपा के ‘इकलौते विधायक’, निधन से बलिया में शोक

बलिया: बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ नेता और रसड़ा विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह का पांच अगस्त को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही बलिया में शोक की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके राजनीतिक व सामाजिक योगदान को याद कर रहे हैं।

उमाशंकर सिंह की पहचान ऐसे नेता के तौर पर रही, जिन्होंने मुश्किल राजनीतिक परिस्थितियों में भी रसड़ा विधानसभा सीट पर अपनी पकड़ कायम रखी। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब उत्तर प्रदेश में बसपा का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा, तब उमाशंकर सिंह ही पार्टी के इकलौते विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे थे।

2012 में पहली बार बने विधायक

उमाशंकर सिंह मूल रूप से बलिया जिले के नगरा थाना क्षेत्र के खनवर गांव के रहने वाले थे। उनका जन्म 2 जनवरी 1971 को खनवर गांव में हुआ था। उनके पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त पूर्व सैन्यकर्मी थे।

उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वर्ष 1991 में बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज से छात्र संघ का चुनाव लड़कर वह महामंत्री चुने गए। इसके बाद वर्ष 2000 में जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता।

राजनीति में सक्रिय रहने के साथ उन्होंने वर्ष 2009 में व्यवसाय भी शुरू किया। उन्होंने छात्र इंफ्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत की। हालांकि, कारोबार के साथ उनका राजनीतिक जुड़ाव भी जारी रहा।

2011 में बसपा से जुड़े, मायावती ने जताया भरोसा

वर्ष 2011 में उमाशंकर सिंह बसपा सुप्रीमो मायावती के संपर्क में आए और पार्टी में शामिल हो गए। इसके अगले वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में मायावती ने उन्हें रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा का उम्मीदवार बनाया।

उमाशंकर सिंह ने चुनाव में जीत दर्ज करते हुए समाजवादी पार्टी के सनातन पांडेय को हराया और पहली बार विधानसभा पहुंचे।

मोदी लहर में भी कायम रखा रसड़ा का किला

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की मजबूत लहर के बावजूद उमाशंकर सिंह रसड़ा सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे। इसके बाद 2022 में भी उन्होंने जीत दर्ज कर लगातार तीसरी बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया।

2022 के चुनाव में उन्होंने सपा के महेंद्र को 5,194 वोटों से हराया।

यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि उस चुनाव में पूरे उत्तर प्रदेश में बसपा को केवल एक विधानसभा सीट मिली थी और वह सीट उमाशंकर सिंह ने रसड़ा से जीती थी।

2022 में बने बसपा विधायक दल के नेता

2022 में बसपा की बेहद कमजोर चुनावी स्थिति के बीच रसड़ा से जीत दर्ज करने वाले उमाशंकर सिंह पार्टी के इकलौते विधायक बने। उनकी सक्रियता और संगठन में भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी बनाया।

इस तरह वह उत्तर प्रदेश की विधानसभा में बसपा की पूरी विधायी ताकत का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र विधायक रहे।

251 और फिर 351 जोड़ों का कराया सामूहिक विवाह

उमाशंकर सिंह की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही। क्षेत्र में सामाजिक कार्यों के लिए भी वह चर्चा में रहे।

बताया जाता है कि पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने खर्च पर 251 गरीब जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया था। इसके बाद उन्होंने 351 जोड़ों के सामूहिक विवाह का आयोजन भी कराया।

इन कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद परिवारों से सीधा जुड़ाव बनाया।

कोरोना काल में भी लोगों की मदद का दावा

कोरोना महामारी के दौरान भी उमाशंकर सिंह ने अपने क्षेत्र के लोगों की मदद की। उनके बारे में बताया जाता है कि उन्होंने कई जरूरतमंद मरीजों के इलाज में आर्थिक सहायता की और अस्पतालों को ऑक्सीजन सिलेंडर भी उपलब्ध कराए।

स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता और लोगों के बीच लगातार मौजूदगी को उनकी चुनावी सफलता की प्रमुख वजहों में गिना जाता रहा।

जनसेवा और मजबूत जनाधार ने बनाई अलग पहचान

उमाशंकर सिंह की राजनीतिक यात्रा में सबसे उल्लेखनीय बात उनकी लगातार तीन चुनावों में जीत रही। 2012, 2017 और 2022 में रसड़ा से जीत दर्ज कर उन्होंने क्षेत्र में अपना मजबूत जनाधार कायम किया।

खास तौर पर 2022 का चुनाव उनके राजनीतिक सफर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा, जब बसपा के खराब प्रदर्शन के बीच उन्होंने अकेले पार्टी का विधानसभा में खाता खोला।

उमाशंकर सिंह के निधन से बलिया में मायूसी

पांच अगस्त को दिल्ली के अस्पताल में उनके निधन की खबर सामने आने के बाद बलिया और रसड़ा क्षेत्र में शोक का माहौल है। सोशल मीडिया पर समर्थक और स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

राजनीति, संगठन और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे उमाशंकर सिंह का निधन बसपा के साथसाथ उनके समर्थकों के लिए भी बड़ा राजनीतिक और व्यक्तिगत झटका माना जा रहा है।

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