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बारिश में भी क्यों नहीं छोड़नी चाहिए सनस्क्रीन? समझें वजह

देश के कई हिस्सों में इन दिनों मानसून का मौसम बना हुआ है. बारिश और बादलों की वजह से अक्सर लोगों को लगता है कि इस मौसम में त्वचा को धूप से ज्यादा नुकसान नहीं होता, इसलिए सनस्क्रीन लगाने की जरूरत भी नहीं होती. इसी कारण कई लोग मानसून आते ही अपनी स्किनकेयर रूटीन से सनस्क्रीन हटा देते हैं. हालांकि त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि सनस्क्रीन सिर्फ तेज धूप वाले दिनों के लिए ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की त्वचा की देखभाल का भी एक अहम हिस्सा है.

बारिश में भी क्यों नहीं छोड़नी चाहिए सनस्क्रीन? समझें वजह

त्वचा को स्वस्थ और सुरक्षित रखने के लिए का इस्तेमाल बेहद जरूरी माना जाता है. सही सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकता है. हालांकि इसका असर तभी बेहतर होता है, जब इसे सही तरीके से और अपनी त्वचा के अनुसार चुना जाए. आइए जानते हैं कि बारिश के मौसम में भी सनस्क्रीन लगाने की सलाह क्यों दी जाती है, मानसून में किस तरह की सनस्क्रीन चुननी चाहिए और इसे लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

बारिश के मौसम में भी सनस्क्रीन लगाने की सलाह क्यों दी जाती है?

के अनुसार, सिर्फ धूप वाले दिनों में ही नहीं, बल्कि बादल या बारिश होने पर भी त्वचा सूरज की हानिकारक UV किरणों के संपर्क में आ सकती है. AAD का कहना है कि 80% तक UV किरणें बादलों के आरपार पहुंच सकती हैं, इसलिए मानसून में भी त्वचा की सुरक्षा जरूरी रहती है. अगर लंबे समय तक बिना सुरक्षा के बाहर रहा जाए, तो त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है.

नियमित रूप से सनस्क्रीन लगाने से सनबर्न, समय से पहले झुर्रियां, त्वचा पर दागधब्बे और UV किरणों से होने वाले नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है. यही वजह है कि त्वचा विशेषज्ञ हर मौसम में सनस्क्रीन को स्किनकेयर रूटीन का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं. चाहे मौसम धूप वाला हो, बादलों से घिरा हो या हल्की बारिश हो रही हो, बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना त्वचा की सुरक्षा के लिए फायदेमंद माना जाता है.

मानसून में किस तरह की सनस्क्रीन चुननी चाहिए?

मानसून में ब्रॉडस्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें, जो UVA और UVB दोनों किरणों से सुरक्षा दे. कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है.

अगर बारिश या पसीना ज्यादा आता है, तो वॉटररेजिस्टेंट सनस्क्रीन चुनना फायदेमंद हो सकता है. तैलीय त्वचा वाले लोग हल्की, जेल या मैट फिनिश वाली सनस्क्रीन चुन सकते हैं, जबकि रूखी त्वचा वाले लोग मॉइस्चराइजिंग सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं.

बारिश के मौसम में सनस्क्रीन लगाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

सनस्क्रीन बाहर निकलने से करीब 15 से 20 मिनट पहले लगाएं, ताकि यह त्वचा पर अच्छी तरह काम कर सके. चेहरे के साथ गर्दन, कान और हाथों जैसी खुली त्वचा पर भी इसे लगाना न भूलें.

अगर लंबे समय तक बाहर रहें या चेहरा बारबार पोंछें, तो जरूरत के अनुसार दोबारा सनस्क्रीन लगाएं. सिर्फ बारिश होने की वजह से सनस्क्रीन छोड़ना सही नहीं माना जाता. रोज़ाना इसका सही तरीके से इस्तेमाल करना त्वचा की सुरक्षा के लिए जरूरी है.

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