
जर्मनी: दुनिया में जहां मकानों का किराया लगातार बढ़ रहा है, वहीं जर्मनी के ऑग्सबर्ग शहर में एक ऐसी अनोखी आवासीय कॉलोनी है, जहां करीब 500 साल से किराया लगभग जस का तस बना हुआ है। इस जगह का नाम फुगेराई (Fuggerei) है। यहां पात्र निवासियों को आज भी सालाना महज 88 यूरो सेंट किराया देना होता है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 80 रुपये के आसपास बैठता है।
500 साल पुरानी है यह कॉलोनी
फुगेराई की स्थापना 16वीं शताब्दी में जर्मनी के धनी व्यापारी जैकब फुगर ने गरीब और जरूरतमंद लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। इसका निर्माण 1514 से शुरू हुआ और शुरुआती परिसर 1523 के आसपास विकसित हुआ। इसे दुनिया की सबसे पुरानी सामाजिक आवासीय बस्तियों में गिना जाता है।
इस कॉलोनी का खास उद्देश्य ऐसे लोगों को रहने के लिए घर देना था, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों और सामान्य किराया चुकाने में परेशानी महसूस करते हों। सदियों बाद भी यह परंपरा जारी है।
आज भी इतना कम है सालाना किराया
फुगेराई की सबसे खास बात इसका बेहद कम किराया है। यहां सालाना किराया 88 यूरो सेंट बताया जाता है। यह राशि आज के समय में भी बहुत कम है, खासकर उन शहरों की तुलना में जहां मकान का मासिक किराया ही हजारों रुपये या उससे कहीं अधिक होता है।
हालांकि, यहां रहने वाले लोगों को केवल कम किराये के आधार पर घर नहीं मिल जाता। इसके लिए कुछ निर्धारित पात्रता शर्तें भी पूरी करनी होती हैं।
कौन रह सकता है इस कॉलोनी में?
फुगेराई में रहने के लिए पारंपरिक रूप से कुछ प्रमुख शर्तें बताई जाती हैं:
- आवेदक का कैथोलिक ईसाई होना जरूरी है।
- उसे कम से कम दो साल से ऑग्सबर्ग का निवासी होना चाहिए।
- उसे आर्थिक जरूरत के आधार पर पात्र माना जाना चाहिए।
इसके अलावा, आवेदकों की स्थिति और उपलब्ध आवास के अनुसार चयन किया जाता है। इसलिए यहां कोई भी व्यक्ति सिर्फ कम किराया देखकर सीधे घर नहीं ले सकता।
आखिर 500 साल से किराया क्यों नहीं बढ़ा?
फुगेराई की स्थापना एक सामाजिक और धार्मिक उद्देश्य से की गई थी। जैकब फुगर चाहते थे कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सम्मान के साथ रहने के लिए सुरक्षित जगह मिले। इसी उद्देश्य से यहां किराये की राशि को परंपरागत रूप से बहुत कम रखा गया।
यह आवासीय परिसर आज भी उसी विचार का प्रतीक है कि जरूरतमंद लोगों को रहने की सुविधा उपलब्ध कराना केवल कारोबार नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी हो सकती है।
फुगेराई की कहानी दुनिया के लिए एक मिसाल है। जहां बढ़ती महंगाई के बीच घर लेना और किराया चुकाना चुनौती बनता जा रहा है, वहीं जर्मनी की यह ऐतिहासिक कॉलोनी सैकड़ों साल पुरानी किफायती आवास व्यवस्था को आज भी जीवित रखे हुए है।



