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​​​​​बिहार का अनोखा मंदिर! जहां​​​ बकरे की बलि देने के बाद भी नहीं जाती जान, दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग

​​​​​बिहार का अनोखा मंदिर! जहां​​​ बकरे की बलि देने के बाद भी नहीं जाती जान, दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग

कैमूर, बिहार: भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं लोगों को हैरान कर देती हैं। बिहार के कैमूर जिले में स्थित मां मुंडेश्वरी देवी मंदिर भी ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है। यहां बकरे की बलि देने की अनोखी परंपरा प्रचलित है, लेकिन इस परंपरा में बकरे की जान नहीं ली जाती। यही वजह है कि इस मंदिर की चर्चा दूर-दूर तक होती है।

बलि की परंपरा है सबसे अनोखी

मां मुंडेश्वरी मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर माता के दरबार में बकरा लेकर पहुंचते हैं। यहां पुजारी बकरे को माता की प्रतिमा के सामने लाते हैं और पूजा की विशेष प्रक्रिया शुरू करते हैं। मान्यता के अनुसार, पुजारी माता की प्रतिमा को स्पर्श कर बकरे पर अक्षत यानी चावल छिड़कते हैं। इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है और इसके बाद बकरे को छोड़ दिया जाता है।

इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि यहां सामान्य तरीके से पशु की हत्या नहीं की जाती। इसी अनोखी पूजा पद्धति को देखने और माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से पहुंचते हैं।

तीन बार रंग बदलता है पंचमुखी शिवलिंग!

इस मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता लोगों को हैरान करती है। यहां भगवान शिव का एक प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है। कहा जाता है कि इस शिवलिंग का रंग दिन में तीन बार बदलता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं में इसे भगवान शिव का चमत्कार माना जाता है। हालांकि, रंग बदलने के पीछे का वैज्ञानिक कारण स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं है।

चंड-मुंड के वध से जुड़ी है मंदिर की कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी क्षेत्र में माता ने चंड और मुंड नामक असुरों का वध किया था। इसी वजह से देवी को मुंडेश्वरी के नाम से जाना जाता है। मंदिर में मां की पूजा के साथ भगवान शिव की भी विशेष आराधना की जाती है।

कितना पुराना है यह मंदिर?

कैमूर की पवरा पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर अपनी प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक इतिहास के लिए भी जाना जाता है। पहाड़ी पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचाई की ओर जाना पड़ता है। यहां सालभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है।

मां मुंडेश्वरी मंदिर की अनोखी पूजा परंपरा और पंचमुखी शिवलिंग से जुड़ी मान्यताएं इसे देश के चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं।

सत्यम रिपोर्ट: इस लेख में मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं का उल्लेख किया गया है। चमत्कारों से जुड़े दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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