IndiaUttar Pradesh

​यूपी: महानवमी पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित, CM योगी ने किया ऐलान

उत्तर प्रदेश सरकार ने महानवमी के अवसर 19 अक्टूबर को पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. इससे प्रदेश के लोगों को अपने परिवारों के साथ इस शुभ त्योहार को मनाने का मौका मिल सकेगा. संभागीय आयुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों , उच्च न्यायालय, बैंकों और संबंधित विभागों को संशोधित आदेश का पालन करने का निर्देश दिया गया है. राज्य में इससे पहले महानवमी और विजयदशमी के उपलक्ष्य में 20 अक्टूबर को अवकाश घोषित किया था, लेकिन हासिल फैसले के अनुसार, अब 19 और 20 अक्टूबर दोनों दिन सार्वजनिक अवकाश रहेगा.

​यूपी: महानवमी पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित, CM योगी ने किया ऐलान

नवरात्रि के नौवें दिन मनाया जाने वाला यह पवित्र त्योहार ‘महानवमी’ देवी दुर्गा के भक्तों के लिए धार्मिक महत्व रखता है. यह त्योहार देवी के नौ रूपों को समर्पित नौ दिवसीय उत्सव का समापन है और पूरे देश में प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों और विशेष धार्मिक समारोहों के साथ इसे मनाया जाता है.

लोगों को महानवमी परिवार के साथ मनाने का मिला मौका

महानवमी के मौके पर भक्त पारंपरिक रूप से मंदिरों में जाते हैं, प्रार्थना करते हैं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं. नवरात्रि के दौरान विभिन्न मंदिरों और धार्मिक केंद्रों में विशेष पूजाअर्चना और अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं. अब सीएम योगी द्वारा महानवमी पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा से उत्सवों में लोगों की भागीदारी को सुगम बनाने और धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस खास त्योहार को मनाने में मदद मिलेगी.

सीएम योगी ने देवी को महिलाओं के साहस का बताया प्रतीक

नवरात्रि के छठे दिन भक्त मां कात्यायनी की पूजा करते हैं. इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए देवी को महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और वीरता का प्रतीक बताया. अपने संदेश में उन्होंने कहा, ‘सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली मां कात्यायनी महिलाओं के अदम्य साहस, अटूट दृढ़ संकल्प और अजेय वीरता का प्रतीक हैं’.

विपक्ष और माफियाओं पर भी साधा निशाना

सीएम योगी ने कहा, ‘2017 से पहले राज्य में भय और अराजकता का माहौल था, जहां बेटियों के सपनों पर रोक लगाई गई थी, उनका आत्मविश्वास कुचला गया था और अवसरों की कमी के कारण उनकी प्रतिभा को नुकसान उठाना पड़ा था. खेल के मैदान माफियाओं के नियंत्रण में थे, संसाधनों की कमी थी और लड़कियों को पंख देने के बजाय उनके सपने चार दीवारों के अंदर ही सीमित कर दिए गए थे, लेकिन पिछले साढ़े 9 वर्षों में राज्य में बदलाव का एक नया अध्याय लिखा गया है. भय की जगह सुरक्षा ने ले ली है, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन ने ले ली है और संसाधनों की कमी की जगह खेल सुविधाओं का विस्तार हुआ है’.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply