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​UP News: यूपी में 900 नई अदालतों का शासनादेश जारी, 75 जिलों में बनेंगी अदालतें

​UP News: यूपी में 900 नई अदालतों का शासनादेश जारी, 75 जिलों में बनेंगी अदालतें

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए 900 नई अदालतों के गठन का शासनादेश जारी कर दिया है। न्याय विभाग की ओर से जारी आदेश के तहत प्रस्तावित 9,149 न्यायालयों के गठन के प्रथम चरण में 900 अदालतों और उनके सहवर्ती पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।

शासनादेश के अनुसार, नई अदालतों में 237 अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, 391 सिविल जज और 272 सिविल जज स्तर की अदालतें शामिल हैं। इनके संचालन के लिए न्यायिक अधिकारियों के साथ स्टेनोग्राफर, मुंसारिम, रीडर, वरिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक समेत कुल 6,656 पद सृजित किए गए हैं।

इनमें अपर जिला एवं सत्र न्यायालय स्तर के लिए 1,896, सिविल जज के लिए 3,128 और सिविल जज के लिए 1,632 पद शामिल हैं।

शासनादेश के संलग्नक2 में सभी 75 जिलों में प्रस्तावित नई अदालतों का जिलेवार विवरण दिया गया है। कानपुर नगर में सर्वाधिक 35 अदालतें प्रस्तावित हैं। इसके अलावा आजमगढ़ में 31, लखनऊ और सुल्तानपुर में 2828, सीतापुर में 25 और देवरिया में 24 अदालतें स्थापित की जाएंगी। वाराणसी और बहराइच में 2323, गोरखपुर में 21 तथा मथुरा, मेरठ और जौनपुर में 2020 नई अदालतें प्रस्तावित हैं। अमेठी में इस चरण में कोई नई अदालत नहीं दी गई है।

नई अदालतों के लिए भर्ती प्रक्रिया मौजूदा स्वीकृत पदों की रिक्तियों पर भर्ती पूरी होने और नवसृजित पदों के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद शुरू की जाएगी। शासन ने स्पष्ट किया है कि शेष चरणों में प्रस्तावित अदालतों और पदों के सृजन पर उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और वित्तीय संसाधनों को देखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अदली, प्यून और दफतरी के नियमित मानव संसाधन के समकक्ष पद सृजित नहीं किए जाएंगे। इन सेवाओं के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से मानवशक्ति उपलब्ध कराई जाएगी।

नई अदालतों के गठन से प्रदेश में न्यायिक ढांचे के विस्तार के साथ अदालतों के बढ़ते कार्यभार को संभालने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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