
लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन और संविदा कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के बीच शनिवार को ऊर्जा मंत्री एके शर्मा की मौजूदगी में बैठक आयोजित हुई। बैठक में कॉरपोरेशन से हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों के आंकड़ों को लेकर प्रबंधन और संगठन के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
संगठन ने आरोप लगाया कि कॉरपोरेशन प्रबंधन ने अपने 15 मई17 के आदेश का उल्लंघन कर करीब 25,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को काम से हटा दिया। हालांकि, कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने केवल 9,000 कर्मचारियों को हटाने की पुष्टि की। संगठन ने इस दावे को गलत बताते हुए कहा कि 1 मई25 को केवल मध्यांचल से ही 9,000 कर्मी हटाए गए थे। आंकड़ों में विरोधाभास देख ऊर्जा मंत्री ने निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र कमेटी गठित करने के निर्देश दिए, जिसमें कॉरपोरेशन के अध्यक्ष और एमडी शामिल नहीं होंगे।
18 हजार रुपये वेतन पर बनी सहमति
संगठन के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि लाइनमैन और पेट्रोलमैन की कमी के कारण अकुशल कर्मियों से काम लिया जा रहा है। पिछले 107 दिनों में 82 बड़े हादसों में 44 कर्मचारियों की मौत और 38 के गंभीर रूप से घायल होने का मुद्दा उठाया गया। ऊर्जा मंत्री ने इन मामलों की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और सभी जरूरी सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने का आश्वासन दिया। बैठक में 18,000 रुपये वेतन निर्धारण और कार्य के अनुसार अनुबंध करने पर सहमति बनी, लेकिन मार्च23 से हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और छुट्टियों की मांग पर सहमति नहीं बन सकी।



