Lucknow News: शहर में ठोस कचरा प्रबंधन के लिए लखनऊ नगर निगम की ओर से अपनाई जा रही व्यवस्था और तकनीकों का अध्ययन करने के लिए कोलकाता नगर निगम की टीम बुधवार को लखनऊ पहुंची. टीम ने शिवरी स्थित प्रोसेसिंग साइट समेत शहर में कचरा प्रबंधन से जुड़ी कई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. इस दौरान अधिकारियों ने कचरे के संग्रहण से लेकर उसके वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी टीम को दी.

शिवरी साइट पर बायोरेमेडिएशन की प्रक्रिया देखी
कोलकाता नगर निगम की टीम ने शिवरी स्थित प्रोसेसिंग साइट का दौरा किया. यहां टीम ने पुराने यानी लिगेसी वेस्ट के बायोरेमेडिएशन और नए कचरे के प्रसंस्करण की प्रक्रिया को समझा. अधिकारियों ने बताया कि पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से अलगअलग हिस्सों में बांटकर उसका निस्तारण किया जाता है. वहीं, रोजाना आने वाले नए कचरे को भी प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए निस्तारित किया जा रहा है.
टीम ने कचरे की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले अलगअलग बायप्रोडक्ट के निस्तारण की व्यवस्था की भी जानकारी ली. अधिकारियों ने मौके पर चल रही पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया.
हर दिन 2550 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की क्षमता
लखनऊ नगर निगम के मुताबिक, शहर से रोजाना निकलने वाले फ्रेश वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए तीन प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई हैं. इन सभी यूनिटों की कुल क्षमता 2550 मीट्रिक टन प्रतिदिन है. नगर निगम का दावा है कि इन यूनिटों के जरिए शहर से निकलने वाले फ्रेश वेस्ट का शतप्रतिशत वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है. कचरे की प्रोसेसिंग के दौरान निकलने वाले बायप्रोडक्ट का भी वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाता है. कोलकाता की टीम ने इस व्यवस्था को मौके पर समझा.
18.49 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण
नगर निगम ने पुराने कचरे यानी लिगेसी वेस्ट के निस्तारण में भी प्रगति की है. अधिकारियों के अनुसार, अनुबंधित 18.49 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है. इसके अलावा करीब 3 लाख 45 हजार मीट्रिक टन आरडीएफ यानी Refuse Derived Fuel का भी निस्तारण किया गया है. लिगेसी वेस्ट की प्रोसेसिंग से निकलने वाले दूसरे बायप्रोडक्ट के निस्तारण की व्यवस्था भी की गई है. टीम ने इस पूरी प्रक्रिया को समझा और लखनऊ में अपनाई जा रही तकनीक की जानकारी ली.
कचरे से तैयार कंपोस्ट को ग्रैन्यूल में बदला जा रहा
फ्रेश वेस्ट की प्रोसेसिंग से तैयार होने वाले कंपोस्ट को अब ग्रैन्यूल फॉर्म में तैयार किया जा रहा है. नगर निगम के अनुसार, इसकी मांग के मुताबिक इसके इस्तेमाल की व्यवस्था भी की गई है. इससे कचरे के निस्तारण के साथ उससे उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है.
C&D वेस्ट सेंटर और ईवाहनों की व्यवस्था देखी
अध्ययन के दौरान कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में बनाए गए C&D यानी निर्माण एवं विध्वंस कचरा संग्रहण केंद्रों का भी निरीक्षण किया. इसके अलावा टीम ने वार्ड स्तर पर इस्तेमाल किए जा रहे इलेक्ट्रिक वाहनों और उनके चार्जिंग स्टेशनों की व्यवस्था भी देखी. टीम ने कचरा घरों से उठाने, उसे ले जाने और प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था की जानकारी ली.
दोनों नगर निगमों के बीच अनुभवों का आदानप्रदान
इस दौरे के दौरान लखनऊ और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के बीच ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई. बायोरेमेडिएशन, आरडीएफ, कंपोस्ट और कचरे से निकलने वाले बायप्रोडक्ट के निस्तारण जैसे विषयों पर अनुभव साझा किए गए. कोलकाता नगर निगम की टीम का यह दौरा दोनों शहरों के बीच बेहतर कचरा प्रबंधन की तकनीकों और कार्यप्रणालियों को साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.



