
डिजिटल डेस्क लखनऊ: एक दशक पहले भारत ने सिर्फ एक नया पेमेंट सिस्टम शुरू नहीं किया था, बल्कि डिजिटल भुगतान की ऐसी व्यवस्था की नींव रखी, जिसने आम लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक के पैसे के लेनदेन का तरीका बदल दिया। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने 10 साल की यात्रा में अभूतपूर्व विस्तार हासिल किया है।
वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, FY 201617 में UPI के जरिए करीब 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। FY 202526 में यह आंकड़ा बढ़कर 24,161.69 करोड़ हो गया। यानी एक दशक में सालाना ट्रांजैक्शन वॉल्यूम करीब 13,500 गुना बढ़ा। वहीं, लेनदेन की कुल वैल्यू FY 201617 के करीब 0.07 लाख करोड़ से बढ़कर FY 202526 में 314.23 लाख करोड़ हो गई।
10 साल में कैसे बदली डिजिटल पेमेंट की तस्वीर?
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने भारतीय रिजर्व बैंक की नियामकीय निगरानी में शुरू किया था। इसके जरिए अलगअलग बैंकों के खातों के बीच मोबाइल से तुरंत पैसे भेजना और लेना आसान हुआ।
धीरेधीरे QR कोड आधारित भुगतान, दुकानों पर डिजिटल पेमेंट और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच तत्काल रकम ट्रांसफर रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए।
UPI Annual Transaction Volume in Crore ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का करीब 63 प्रतिशत हिस्सा हैं।
वहीं PersontoPerson ट्रांजैक्शन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू का करीब 71 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। इससे पता चलता है कि UPI एक तरफ छोटे खुदरा भुगतान का बड़ा माध्यम है, तो दूसरी तरफ लोगों के बीच अपेक्षाकृत बड़े फंड ट्रांसफर के लिए भी इस्तेमाल हो रहा है।
दुनिया के रियलटाइम पेमेंट सिस्टम में भारत की बड़ी हिस्सेदारी
UPI की सफलता अब भारत तक सीमित नहीं है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में दुनिया के रियलटाइम पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत रही। सरकार इसे लेनदेन की संख्या के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रियलटाइम पेमेंट सिस्टम बताती है।
यानी भारत ने डिजिटल पेमेंट के मामले में सिर्फ घरेलू स्तर पर विस्तार नहीं किया, बल्कि UPI को वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण डिजिटल पेमेंट मॉडल के रूप में स्थापित किया है।
11 देशों तक पहुंचा भारत का UPI
MadeinIndia UPI अब विदेशों में भी इस्तेमाल हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, UPI सेवाएं 11 विदेशी देशों में उपलब्ध हैं। इनमें भूटान, सिंगापुर, UAE, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, कतर, ग्रीस और कंबोडिया समेत अन्य देश शामिल हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय विस्तार से भारतीय यात्रियों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भी सीमा पार डिजिटल भुगतान की सुविधा बढ़ी है।
UPI सिर्फ तकनीक नहीं, वित्तीय समावेशन का जरिया
UPI की 10 साल की यात्रा को केवल ट्रांजैक्शन के आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता। इसकी बड़ी उपलब्धि यह है कि इसने डिजिटल पेमेंट को समाज के बड़े हिस्से तक पहुंचाया।
मोबाइल फोन और इंटरनेट के जरिए भुगतान करने की सुविधा ने छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद की है। इसी वजह से UPI को भारत के Digital Public Infrastructure के महत्वपूर्ण स्तंभों में गिना जाता है।
10 साल में UPI की कहानी यह दिखाती है कि जब तकनीक को सरल बनाकर बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाया जाता है, तो वह सिर्फ भुगतान का तरीका नहीं बदलती, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था में लोगों की भागीदारी का तरीका भी बदल सकती है।
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