राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद खूब बवाल मचा. SIT की जांच के बाद 8 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तार किया गया. राम मंदिर ट्रस्ट में प्रबंधन की भूमिका निभा रहे पदाधिकारियों की भूमिका पर कई सवाल उठे. इसके अलावा रामलला के दर्शन के लिए वीआईपी पास जारी करने की प्रक्रिया में भी गड़बड़ियों का भी मामला सामना आया. आरोप यह भी लगे कि वीआईपी पास जारी कर रामलला के दर्शन के लिए भक्तों से वसूली की जा रही है.

राम मंदिर में VIP पास एक विशेष प्रवेश व्यवस्था है. इसके जरिए कुछ लोगों को सामान्य कतार से अलग या प्राथमिकता के साथ दर्शन की सुविधा दी जाती है. यह पास आमतौर पर वरिष्ठ नागरिकों, सरकारी अधिकारियों, और मंदिर के विशेष अतिथियों के लिए होते हैं. इसे सुगम दर्शन पास भी कहा जाता है.
अब तक रामलला के दर्शन के लिए कौन करता था वीआईपी पास जारी?
अब तक ट्रस्ट के महासचिव ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव की आईडी के जरिए वीआईपी दर्शन पास किए जाते हैं. यानी पास जारी करने का अधिकार उन्हीं के पास था. आसान भाषा में समझे तो अगर ट्रस्ट के सदस्य VIP दर्शन पास सीधे अपने डिजिटल अकाउंट या सिफारिशी पत्र से किसी व्यक्ति के नाम जारी करते हैं. फिर पास काउंटर पर बैठे लोग इस डिजिटल सिस्टम के जरिए आए ऑनलाइन अनुरोध या उनकी मुहर लगे कागजों का सत्यापन कर पास जारी करते थे.
ट्रस्ट ने वीआईपी पास जारी करने की व्यवस्था में क्याक्या बदलाव किए?
- चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को वीआईपी दर्शन पास जारी कराने का अधिकार प्राप्त था.
- हालांकि अब यह जिम्मेदारी ट्रस्ट के सदस्य महंत दिनेंद्र दास को सौंप दी गई है.
- चंपत राय, अनिल मिश्रा की पास जारी करने की डिजिटल आईडी सस्पेंड
- पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी का दुरुपयोग कर अंधाधुंध पास जारी करने का मामला सामने आया था
ट्रस्ट के अधिकृत पदाधिकारी के अलावा और कौन जारी कर सकता है वीआईपी पास?
राम मंदिर में वीआईपी पास निशुल्क बनता है. इसके लिए पैसे लेने की कोई व्यवस्था है. हालांकि, एसआईटी की जांच में इसमें भी गड़बड़ियां सामने आई है. वीआईपी पास केवल अधिकृत व्यक्तियों की सिफारिश और पहले से तय प्रक्रिया के तहत ही जारी किए जाते हैं. ट्रस्ट के अधिकृत पदाधिकारी के आलावा इस पास को अयोध्या के डीएम, एसएसपी, डीआईजी भी वीआईपी पास जारी कर सकते हैं. इन चारों अधिकारियों को प्रशासन की तरफ से 200200 पास जारी करने की सुविधा मिली हुई है.
वहीं ट्रस्ट की तरफ से पास जारी करने की कोई निर्धारित सीमा नहीं है. लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बयानों के मुताबिक यहां से रोजाना 100 से लेकर 200 पास जारी किए जाते हैं. लेकिन एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रस्टियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी का दुरुपयोग कर अंधाधुंध वीआईपी पास जारी किए गए. यही वजह है कि अब चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के क्रेडेंशियल को डिएक्टिवेट कर, सिर्फ दिनेंद्र दास की आईडी पर पास जारी किए जाएंगे.
ऑनलाइन वीआईपी पास के लिए कैसे अप्लाई किया जाता है?
- पास बनवाने के लिए सबसे पहले आप आधिकारिक वेबसाइट online.srjbtkshetra.org पर जाएं.
- इसके बाद आपको होमपेज पर नीचे पास बनवाने से जुड़ा लिंक मिलेगा, जहां क्लिक करें.
- इसके बाद अलगअलग आरती और दर्शन के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
- जिस ऑप्शन के लिए पास बनवाना चाहते हैं, उस पर क्लिक करें.
- आपके सामने फोन नंबर का ऑप्शन आएगा.
- आप फोन नंबर एंटर करें और ओटीपी के जरिए लॉगिन कर लें.
- आप ईमेल आईडी के जरिए भी लॉगिन कर सकते हैं.
- इसके बाद आपके सामने ऊपर दी गई स्क्रीन आएगी. जहां आपको डिटेल भरनी है.
- इसमें आपको कितने लोगों के पास चाहिए, उसकी डिटेल भरनी होगी.
- आप एक लॉगिन से सिर्फ 5 लोगों का ही पास बनवा सकते हैं. फिर आप तारीख आदि भरें.
- तारीख आपको कैलेंडर से सेलेक्ट करनी होगी. इसमें जिस तारीख पर हरा बॉक्स होगा, उसका पास मिल जाएगा.
- इसमें अगले 15 दिनों की तारीख सेलेक्ट कर सकते हैं.
- अगर लाल बॉक्स आ रहा है तो समझ जाइए कि उस तारीख की पास लिमिट खत्म हो चुकी है.
- अगर आपको किसी दिन का ग्रीन बॉक्स मिलता है यानी स्लॉट मिलता है तो आप सेलेक्ट कर अपना पास हासिल कर सकते हैं.
- अप्रूवल के बाद ऑनलाइन ही आप अपना पास डाउनलो़ड कर सकते हैं,
ऑफलाइन कैसे करते हैं वीआईपी पास के लिए अप्लाई?
ऑफलाइन तरीके से वीआईपी पास या सुगम दर्शन पास के लिए पास काउंटर पर जाकर एक निर्धारित फॉर्म भरना होता है. इसमें श्रद्धालुओं का नाम, उम्र, जेंडर और पहचान पत्र की डिटेल देना होता है. ऑफलाइन में एक फॉर्म पर अधिकतम 8 लोगों को पास जारी किया जा सकता है. जिस पदाधिकारी और अधिकारी के नाम से श्रद्धालु को पास जारी होता है, उसका नाम भी उसमें दर्ज होता है.
ट्रस्ट ने व्यवस्था में किया बदलाव , लेकिन साख पर सवाल
रामलला दर्शन के लिए VIP पास श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रोटोकॉल व्यवस्था को देखते हुए दी गई थी. लेकिन इसके कथित दुरुपयोग की आशंका ने ट्रस्ट की साख और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. फिलहाल, ट्रस्ट ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए कई पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी निष्क्रिय कर दी और पास जारी करने का अधिकार सीमित कर दिया, लेकिन इसके बावजूद चढ़ावा चोरी के साथसाथ वीआईपी पास के जरिए वसूली के कथित मामले ने भी भक्तों के विश्वास डगमगाया है.


