HealthIndiaTrending

जवानी में ही धुंधली पड़ सकती है नजर, Diabetes और High BP वालों के लिए जरूरी चेतावनी..

जवानी में ही धुंधली पड़ सकती है नजर, Diabetes और High BP वालों के लिए जरूरी चेतावनी..

मोतियाबिंद एक आम समस्या है जिसमें लोगों की नजर धीरे-धीरे और बिना किसी दर्द के कम होने लगती है। अक्सर इसे बुढ़ापे से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी पुरानी बीमारियां मोतियाबिंद को बढा देती है और कुछ लोगों को उम्र से पहले ही दिखना बंद हो जाता है। आज समझते हैं इसके बारे में विस्तार से।

HT लाइफ़स्टाइल से बात करते हुए मोतियाबिंद, कॉर्निया और रिफ्रैक्टिव सर्जन  ने बताया कि  “मोतियाबिंद तब होता है जब आंख का नैचुरल लेंस धीरे-धीरे अपनी स्पष्टता खोने लगता है और धुंधला हो जाता है, जिससे रोशनी अंदर नहीं जा पाती। लक्षणों के धीरे-धीरे बढ़ने के कारण कई लोगों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उनकी नज़र कैसे लगातार खराब होती जा रही है।” मोतियाबिंद के आम लक्षणों में शामिल है: धुंधली नज़र, रात में गाड़ी चलाते समय चकाचौंध महसूस होना, रंग फीके दिखना, पढ़ने में कठिनाई और चश्मे के नंबर में बार-बार बदलाव।


डायबिटीज इस तरह आंखों पर करती है अटैक

डॉक्टर कहते हैं- डायबिटीज़ के मरीज़ों में कम उम्र में ही मोतियाबिंद होने की संभावना ज़्यादा होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लंबे समय तक ब्लड शुगर का लेवल बढ़ा रहने से आंख के लेंस में धीरे-धीरे बदलाव आते हैं, जिससे समय के साथ उसमें धुंधलापन आ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योंकि यह व्यक्ति की सेहत पर बुरा असर डालता है। हालाँकि, यह एक ऐसी स्थिति भी है जो आंखों की सेहत को प्रभावित कर सकती है और आंखों की रोशनी जा सकती है।

डॉक्टर का कहना है कि- “लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने से शरीर की सभी रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को नुकसान पहुंच सकता है, जिनमें आंखों तक रक्त पहुंचाने वाली वाहिकाएं भी शामिल हैं। अध्ययनों से पता चला है कि उम्र के साथ होने वाले मोतियाबिंद का संबंध हाइपरटेंशन से है, खासकर तब जब शरीर में अन्य बीमारियाँ भी मौजूद हों। मरीजों को एक ही समय में आंखों से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी या ग्लूकोमा, इसलिए आंखों की नियमित जांच बहुत ज़रूरी है।


मोतियाबिंद से आंखों का बचाव कैसे करें

आई सर्जन के अनुसार, अच्छी बात यह है कि मोतियाबिंद का इलाज संभव है। आधुनिक मोतियाबिंद सर्जरी से कई लोगों की आंखों की रोशनी वापस आ गई है और हालांकि उम्र बढ़ना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखकर आंखों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है। नियमित और पूरी तरह से आंखों की जांच करवाने से, खासकर 40 साल की उम्र के बाद, मोतियाबिंद और आंखों की अन्य बीमारियों का शुरुआती दौर में ही पता लगाया जा सकता है, इससे पहले कि वे आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर असर डालें।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply