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​​​भारी लहंगा पहन 18 KM का पहाड़ी सफर, 4 घंटे तक चलती रही दुल्हन; रास्ते में CM धामी से कर दी ये मांग​​​​

​​​भारी लहंगा पहन 18 KM का पहाड़ी सफर, 4 घंटे तक चलती रही दुल्हन; रास्ते में CM धामी से कर दी ये मांग​​​​

चकराता, उत्तराखंड: शादी के बाद दुल्हन की विदाई का पल हर परिवार के लिए खास होता है, लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में एक नवविवाहिता को ससुराल पहुंचने के लिए ऐसी मुश्किल का सामना करना पड़ा, जिसने लोगों का ध्यान गांव की सड़क की समस्या की ओर खींच दिया। बताया जा रहा है कि शर्मिला नाम की दुल्हन को भारी लहंगा पहने करीब 18 किलोमीटर का सफर तय करने में लगभग चार घंटे लगे। इस दौरान पहाड़ी रास्ते की परेशानी उसके लिए बड़ी चुनौती बन गई।

विदाई के बाद शुरू हुआ मुश्किल सफर

जानकारी के मुताबिक, शर्मिला की विदाई चकराता क्षेत्र के बुल्हाड़ गांव से हुई थी। उसे लोखंडी स्थित अपने ससुराल पहुंचना था। शुरुआती रास्ते में वह गाड़ी से गई, लेकिन आगे सड़क की स्थिति ऐसी थी कि उसे पैदल ही सफर पूरा करना पड़ा।

शादी का भारी लहंगा पहने पहाड़ी रास्ते पर चलना आसान नहीं था। इसके बावजूद शर्मिला ने ससुराल पहुंचने के लिए सफर जारी रखा। बताया गया है कि इस दौरान उसे कई बार थकान का सामना भी करना पड़ा।

रास्ते की परेशानी के बीच मुख्यमंत्री से की मांग

सफर के दौरान शर्मिला ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की। उसके साथ मौजूद लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया।

इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी गांवों में सड़क संपर्क की समस्या को सामने रखा है। जिन इलाकों में सड़क की सुविधा सीमित होती है, वहां लोगों को रोजमर्रा के कामों, यात्रा और आपातकालीन जरूरतों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

18 किलोमीटर का रास्ता बना चर्चा का विषय

बताया जा रहा है कि शर्मिला को बुल्हाड़ गांव से लोखंडी तक पहुंचने के लिए करीब 18 किलोमीटर का सफर करना पड़ा और इसमें लगभग चार घंटे लग गए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पूरे मार्ग की स्थिति और पैदल तय की गई वास्तविक दूरी का स्वतंत्र विवरण स्पष्ट नहीं है।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, रोजगार और स्थानीय लोगों की आवाजाही से भी जुड़ा होता है। सड़क की कमी का असर खासकर बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों को अस्पताल ले जाने जैसी परिस्थितियों में अधिक पड़ सकता है।

अब गांव तक पक्की सड़क बनने की उम्मीद

शर्मिला की मांग के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या संबंधित अधिकारी इस क्षेत्र की सड़क समस्या पर ध्यान देंगे और गांव तक बेहतर संपर्क मार्ग बनाने के लिए कदम उठाएंगे। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह पुष्टि नहीं की जा सकती कि इस मामले में सड़क निर्माण को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा हुई है या काम शुरू किया गया है।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। सफर की दूरी, समय और सड़क की स्थिति से जुड़े विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

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