
पंचकूला। देश में मॉनसून धीरेंधीरें अपनी विदाई की ओर बढ रहा है। लेकिन जाते जाते भी यह आखिरी बार भारत के राज्यों में बारिश के संकेत दे रहा है। सितंबर के दूसरे हिस्से मे कमजोर मॉनसून के बाद अब फिर से 12 सितंबर से 21 सितंबर के बीच दक्षिण, मध्य , पुर्व और पश्चिमी भारत के इन राज्यों में बारिश का एक सक्रिय दौर शुरू होगा। कई जगहों पर गरजचमक के साथ तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
21 राज्यों में बारिशआधी का अलर्ट
मौसम विभाग ने 12 सितंबर से हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में बारिश की गतिविधि बढ़ने का अनुमान जताया है, विभाग ने कहा है कि उत्तरी हरियाणा और आसपास के इलाकों में समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर एक ऊपरीहवा के दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।
हिमाचल में कहींकहीं छुटपुट बारिश
उत्तराखंड में बुधवार से लगातार पांच दिनों तक कहींकहीं भारी बारिश होने के आसार हैं। हिमाचल प्रदेश में नौ से 11 सितंबर तक कहींकहीं बारिश, 12 सितंबर को छिटपुट बारिश और 13 से 15 सितंबर तक काफी व्यापक बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार नौ सितंबर को सुबह 8.02 बजे जारी ‘अखिल भारतीय मौसम सारांश और पूर्वानुमान बुलेटिन’ में कहा गया है कि 10 से 14 सितंबर तक उत्तराखंड में और 13 एवं 14 सितंबर को हिमाचल प्रदेश में गरज और बिजली के साथ काफी व्यापक बारिश होने का अनुमान है।
दिल्ली में बारिश
उत्तरपश्चिम भारत के शेष हिस्सों में कहींकहीं छिटपुट बारिश के आसार हैं। सात दिनों के बारिश के अनुमान से पता चलता है कि नौ से 11 सितंबर तक हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कहींकहीं बारिश होगी, और उसके बाद 12 से 15 सितंबर तक छिटपुट बारिश होगी। पंजाब में 915 सितंबर की अवधि के दौरान कहींकहीं बारिश होने के आसार हैं।
पश्चिमी विक्षोभ के चलते यूपी के कई जिलों में भारी बारिश
उत्तरपश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में समुद्र तल से 5.8 किमी ऊपर हवा के कम दबाव के क्षेत्र के रूप में देखा गया एक पश्चिमी विक्षोभ भी बना हुआ है। मानसून के कम वायुमंडलीय दबाव का एक लंबा क्षेत्र फिरोजपुर, मुजफ्फरनगर, बरेली, लखनऊ, पटना, बांकुरा और दीघा से होकर दक्षिणपूर्व की ओर उत्तरपूर्वी बंगाल की खाड़ी तक जा रहा है।
जम्मूकश्मीर और लद्दाख में अलर्ट
जम्मूकश्मीर और लद्दाख में 911 सितंबर के दौरान कहींकहीं बारिश और 12 से 15 सितंबर तक छिटपुट बारिश होने के आसार हैं। उत्तरी अंडमान सागर और आसपास के इलाकों में एक और ऊपरीहवा के कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।
ओडिशाबिहार में बारिश का अनुमान
बुलेटिन के अनुसार, इसके असर से 11 सितंबर के आसपास उत्तर आंध्र प्रदेशदक्षिण ओडिशा तटों से सटे पश्चिममध्य और उत्तरपश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनने का अनुमान है। पूर्वी भारत में, नौ से 10 सितंबर को बिहार में, नौ से 11 सितंबर को झारखंड में और नौ सितंबर तथा 11 से 12 सितंबर को ओडिशा में कहींकहीं भारी बारिश होने के आसार हैं। ओडिशा में 10 सितंबर को कहींकहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है।
पश्चिम बंगाल और सिक्किम में होगी बारिश
11 से 13 सितंबर के दौरान उपहिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वोत्तर में, नौ से 12 सितंबर के दौरान असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश होने के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश में नौ और 11 सितंबर को तथा फिर 1314 सितंबर के दौरान भारी बारिश होने के आसार हैं, साथ ही 12 सितंबर को कहींकहीं बहुत भारी बारिश हो सकती है।
छत्तीसगढ़मध्य प्रदेश में भारी बारिश
मध्य भारत के लिए, मौसम विभाग ने 10 से 14 सितंबर तक छत्तीसगढ़ में, 1213 सितंबर को पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में और 12 सितंबर को विदर्भ में कहींकहीं भारी बारिश का अनुमान जताया है। पश्चिमी भारत में, 1213 सितंबर को गुजरात क्षेत्र, कोंकण और गोवा में तथा 13 सितंबर को मध्य महाराष्ट्र में कहींकहीं भारी बारिश होने के आसार है।
पुडुचेरी और कराईकल में भी बारिश
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश का दौर चलने वाला है। 1012 सितंबर को केरल और माहे में, 1112 सितंबर को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में, 1114 सितंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में तथा 1113 सितंबर को तेलंगाना में भारी बारिश का अनुमान है।
912 सितंबर के दौरान आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और कराईकल के कुछ हिस्सों में बिजली कड़कने और 4050 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ आंधीतूफान आने के भी आसार हैं।
लोंगो के लिए ये चेतावनी जारी
खास बात यह है कि विभाग ने चेतावनी दी है कि बहुत भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़, स्थानीय स्तर पर भूस्खलन और मिट्टी धंसने की घटनाएं, कमजोर ढांचों और फसलों को नुकसान तथा सड़क और रेल यातायात में बाधा आ सकती है। प्रभावित इलाकों में लोगों को सलाह दी गयी है कि वे मौसम पर नज़र रखें और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें।
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