बाजार में आप जब भी दूध खरीदने जाते होंगे तो अक्सर देखने को मिलता होगा कि वहां अलग अलग रंगों के पैकेट वाले दूध होते हैं। आमतौर पर लोग इसे पैकेजिंग का एक हिस्सा मानते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। दूध खरीदते समय पैकेट पर दिखने वाले रंग सिर्फ डिजाइन नहीं होते, बल्कि वे दूध की शुद्धता, फैट की मात्रा और उसे प्रोसेस करने के तरीके को दर्शाते हैं। भारत में FSSAI के मानकों के अनुसार, इन रंगों का एक खास मतलब होता है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि दूध के पैकेटों पर बने नीले, हरे और नारंगी रंगों का क्या मतलब होता है। चलिए जानते हैं।

पैकेट के रंगों का असली मतलब
डेयरी कंपनियां आमतौर पर ग्राहकों की पहचान के लिए मानक रंगों का उपयोग करती हैं।
नीला पैकेट
नीले रंग के पैकेट में मिलने वाला दूध ‘टोन्ड मिल्क’ होता है। इसमें फुल क्रीम दूध में स्किम्ड मिल्क पाउडर और पानी मिलाकर फैट की मात्रा कम की जाती है। इसमें लगभग 3.0% फैट और 8.5% SNF होता है।
नारंगी पैकेट
नारंगी/लाल पैकेट नारंगी या लाल रंग के पैकेट ‘फुल क्रीम’ या ‘होल्ड मिल्क’ को दर्शाते हैं। इस दूध से मलाई या फैट निकाला नहीं जाता है। इसमें 6.0% फैट और 9.0% SNF होता है।
हरा पैकेट
हरे रंग का पैकेट अक्सर ‘स्टैंडर्डाइज्ड मिल्क’ के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें फैट की मात्रा को एक निश्चित स्तर पर ‘स्टैंडर्ड’ किया जाता है। इसमें आमतौर पर 4.5% फैट और 8.5% SNF होता है।
क्या पैकेट के रंग से दूध की क्वालिटी पता चलती है?
यह एक बहुत ही सामान्य धारणा है, लेकिन तकनीकी रूप से पैकेट का रंग दूध की ‘क्वालिटी’ नहीं, बल्कि उसमें मौजूद फैट की मात्रा को दर्शाता है।
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