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जब कैलाश छोड़ काशी पहुंचे भगवान शिव, तब क्या हुआ था..?

Kashi Shiva Mythological Story: जब कैलाश छोड़ काशी पहुंचे भगवान शिव, तब क्या हुआ था?

निर्जन और ठंडे कैलाश पर्वत पर रहने वाले महादेव कभी योगी, तो कभी वैरागी कहलाते थे, लेकिन उनके जीवन में भी एक ऐसा दौर आया, जब उन्होंने वैराग्य छोड़कर सांसारिक जीवन में कदम रखा. आइए जानते हैं कि आखिर भगवान शिव कैलाश छोड़ काशी क्यों आए और उसके बाद क्या हुआ?

Kashi Shiva Mythological Story: निर्जन और ठंडे कैलाश पर्वत पर रहने वाले महादेव कभी योगी, तो कभी वैरागी कहलाते थे, लेकिन उनके जीवन में भी एक ऐसा दौर आया, जब उन्होंने वैराग्य छोड़कर सांसारिक जीवन में कदम रखा. आइए जानते हैं कि आखिर भगवान शिव कैलाश छोड़ काशी क्यों आए और उसके बाद क्या हुआ?

भगवान शिव कभी योगी कहलाए तो कभी वैरागी…निर्जन और ठंडे कैलाश पर्वत पर रहने वाले महादेव के जीवन में एक ऐसा दौर आया, जब सांसारिक जीवन में अपना कदम रखा. ऐसे में आपके दिमाग में कई सवाल उठते होंगे कि आखिर महायोगी शिव ‘गृहस्थ’ क्यों बने? क्यों उन्होंने एकांत छोड़कर शादी की? इन सवालों के जवाब जितने आसान दिखते हैं, उतने हैं नहीं.

फिल्मों-सीरियल में ये है दावा

भगवान शिव पर बनी फिल्मों-सीरियल और पुराणों में भी यही बताया गया है कि राक्षस ताड़कासुर का वध करने के लिए भोलेनाथ के पुत्र की जरूरत थी. जिसकी वजह से देवताओं ने उनका विवाह कराया, लेकिन इस सवाल का जवाब सिर्फ यही तक सीमित नहीं है.

क्या कहते हैं पंडित?

कई पंडित दावा करते हैं कि पुराणों और कथाओं में भले ही यह बताया गया है कि महादेव को किसी चीज की इच्छा नहीं थी, लेकिन उनके आसपास मौजूद लोगों यानी सृष्टि की अपनी अलग जरूरतें थीं और इन्हीं की देखभाल करने और लोगों को एक खास संदेश देने से मकसद से उन्होंने शादी की और कैलाश से नीचे आए.

काशी में रहने लगे महादेव

माता पार्वती से विवाह के बाद महादेव गंगा किनारे बसे काशी में रहने लगे. जहां एक तरफ कैलाश में जीवन का नामोनिशान नहीं था, वहीं काशी इसके बिल्कुल विपरीत था. यह नम, उष्ण और उर्वर था. सिर्फ शिव का विवाह ही नहीं, बल्कि उनके दोनों पुत्र भी मानवता की दो सबसे बड़ी जरूरतों को पूरा करते हैं.

आनंदवन बनी काशी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती की गृहस्थ जीवन की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान शिव कैलाश छोड़कर काशी (वाराणसी) पहुंचे. जब वे पहुंचे, तो पूरी नगरी आनंदवन में बदल गई. भगवान शिव ने काशी को मोक्ष का धाम बना दिया, जहां आज भी मान्यता है कि मृत्यु के बाद मुक्ति मिलती है.

गणेश और कार्तिकेय पूरी करते हैं जरूरत

मान्यता है कि एक ओर भगवान गणेश-जिनका पेट बड़ा है, वह संपन्नता का प्रतीक है. वह हमारी भूख मिटाते हैं और इसलिए वे मां अन्नपूर्णा के करीब हैं. वहीं, दूसरी ओर कार्तिकेय, जिनके हाथों में शस्त्र है, देवताओं के सेनापति हैं. वह हमारी सुरक्षा करते हैं और हमारा भय दूर करते हैं. ठीक वैसे ही जैसे शक्ति स्वरूप मां दुर्गा हमारी रक्षा करती हैं.

यहां बताई गई सारी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसकी विषय सामग्री और एआई द्वारा काल्पनिक चित्रण का हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.

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