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Chandipura Virus: क्या है चांदीपुरा वायरस? क्यों बढ़ी फिर चिंता और माता-पिता इन बातों का रखें ख्याल

What Is Chandipura Virus: गुजरात में चांदी वायरस के केसेज बढ़ने के बाद से इसे लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संक्रमण बच्चों में बेहद तेजी से फैलता है और बहुत जल्द गंभीर रूप ले लेता है। इसलिए हर मातापिता को चांदीपुरा वायरस से जुड़ी सभी जानकारी का होना जरूरी है।

Chandipura Virus: क्या है चांदीपुरा वायरस? क्यों बढ़ी फिर चिंता और माता-पिता इन बातों का रखें ख्याल
Chandipura Virus: क्या है चांदीपुरा वायरस? क्यों बढ़ी फिर चिंता और माता-पिता इन बातों का रखें ख्याल

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस Rhabdoviridae फैमिली का वायरस है। इसकी पहचान पहली बार 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी, इसी गांव के नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। यह वायरस मुख्य रूप से एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम यानी मस्तिष्क में सूजन पैदा करता है। यह संक्रमण 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अधिक खतरनाक माना जाता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई के काटने से फैलता है। कुछ अध्ययनों में टिक और कुछ अन्य कीटों की भी चर्चा की गई है, लेकिन यह वायरस सैंड फ्लाई से ही फैलता है। बता दें कि अभी तक इस वायरस के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं।

किन बच्चों को अधिक खतरा होता है?

यह संक्रमण ज्यादातर छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। के दौरान सैंड फ्लाई की संख्या बढ़ने से संक्रमण का जोखिम भी बढ़ जाता है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चों को अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण

इस वायरस के लक्षण बहुत तेजी से विकसित होते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • तेज बुखार
  • उल्टी
  • दस्त
  • अत्यधिक सुस्ती
  • दौरे
  • बेहोशी
  • मानसिक भ्रम

यह लक्षण कुछ ही घंटों में इस प्रकार से फैल जाते हैं कि गंभीर रूप ले लेते है। यदि समय रहते उपचार नहीं शुरु किया गया, तो जान का जोखिम होता है।

क्या इसका इलाज या वैक्सीन उपलब्ध है?

फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज उसके लक्षणों के आधार पर किया जाता है। समय पर अस्पताल पहुंचने और उचित इलाज से मरीज की स्थिति संभाली जा सकती है।

बचाव कैसे करें?

चूंकि इस वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका प्रभावशाली उपाय है।

  • बच्चों को मच्छरदानी या कीटरोधी जाली के अंदर सुलाएं।
  • कीट भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।
  • पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
  • घर और आसपास साफसफाई रखें।
  • कीटों के पनपने वाले स्थान को साफ रखें।
  • बच्चे को अचानक तेज बुखार या दौरे आएं तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।

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