Ghaziabad News: गाजियाबाद के राजेंद्र नगर में एक कथित अवैध स्पीड ब्रेकर के कारण 34 वर्षीय युवक की मौत के मामले में अब प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. पीड़ित परिवार का आरोप है कि सड़क पर बनाए गए अवैध स्पीड ब्रेकर ने राहुल की जान ले ली, लेकिन हादसे के बाद न केवल स्पीड ब्रेकर को हटा दिया गया बल्कि अब नगर निगम मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर पूछे गए सवालों का जवाब देने से भी इनकार कर रहा है.

परिवार के मुताबिक, यह हादसा 6 जून की रात करीब 11:30 बजे हुआ था. राहुल अपने परिवार के लिए खाने का सामान लेने मोटरसाइकिल से निकले थे. सेक्टर2, राजेंद्र नगर स्थित 2nd RM ब्लॉक सोसायटी के सामने हाल ही में बनाए गए स्पीड ब्रेकर से उनकी बाइक उछल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. आसपास के लोग उन्हें दिल्ली के जीटीबी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
हादसे से एक दिन पहले बनाया गया था ब्रेकर
परिजनों का दावा है कि जिस अवैध स्पीड ब्रेकर की वजह से हादसा हुआ, उसे घटना के अगले ही दिन हटा दिया गया. स्थानीय लोगों के अनुसार, यह ब्रेकर राजेंद्र नगर की एक सोसाइटी की RWA ने नगर निगम को पत्र लिखकर बनवाया था. ऐसे में परिजनों का कहना है कि नगर निगम की इस मामले पर जवाबदेही तय होनी चाहिए. ऐसे में परिवार ने नगर निगम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए 9 जून को लिखित शिकायत देकर जवाब मांगा था.
निगम ने कहा नहीं दिया जा सकता जवाब
जब लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला तो परिवार ने 10 जुलाई को दोबारा शिकायत की और मुख्यमंत्री पोर्टल IGRS के माध्यम से भी मामले को उठाया. हालांकि, नगर निगम ने अपने जवाब में कहा कि इस तरह के सवालों का जवाब IGRS के माध्यम से नहीं दिया जा सकता. वहीं पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि IGRS पर भी जवाबदेही तय नहीं होगी तो फिर आम लोगों के लिए इस व्यवस्था का क्या उद्देश्य रह जाता है.
मृतक राहुल के साले सुमित का आरोप है कि शिकायत में केवल सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े सवाल पूछे गए थे. इसमें किसी गोपनीय या संवेदनशील जानकारी की मांग नहीं की गई थी. इसके बावजूद अधिकारियों ने जवाब देने से इनकार कर दिया, जो सरकारी व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है. परिजनों का आरोप है कि ब्रेकर को दुर्घटना के अगले ही दिन बिना जांचपड़ताल के हटा दिया गया था.
परिजनों ने लगाए ये आरोप
परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी असंतोष जताया है. उनका आरोप है कि शुरुआत में थाना पुलिस ने नगर निगम और आरडब्ल्यूए के खिलाफ शिकायत तक दर्ज नहीं की. बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद 22 जून को एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन उसमें किसी को नामजद नहीं किया गया.
परिजनोम का कहना है कि अब तक न तो अवैध स्पीड ब्रेकर बनवाने वालों की जिम्मेदारी तय हुई है और न ही हादसे के बाद साक्ष्य मिटाने के आरोप में कोई कार्रवाई की गई है. पीड़ित परिवार प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है.


