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अमेरिका-ईरान समझौते के बाद क्या होगा आगे? बाजार की नजर इन 5 बड़े ट्रिगर्स पर

वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए आने वाला सप्ताह बेहद अहम रहने वाला है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते से फिलहाल तनाव कम हुआ है, लेकिन निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह समझौता लंबे समय तक टिक पाता है. इसके अलावा अमेरिका की महंगाई, ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक आंकड़े, कोलंबिया का राष्ट्रपति चुनाव और लंदन क्लाइमेट वीक जैसे कई बड़े घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद क्या होगा आगे? बाजार की नजर इन 5 बड़े ट्रिगर्स पर

अमेरिकाईरान समझौते पर टिकी बाजार की नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक बाजारों को राहत मिली है. समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होती दिख रही है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई है.

हालांकि निवेशकों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और किसी भी नई घटना का असर तेल कीमतों तथा शेयर बाजारों पर पड़ सकता है.

अमेरिकी महंगाई के आंकड़े रहेंगे अहम

इस सप्ताह निवेशकों की नजर अमेरिका के पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर प्राइस इंडेक्स पर होगी, जिसे फेडरल रिजर्व महंगाई का प्रमुख पैमाना मानता है. यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ सकती हैं.साथ ही माइक्रोन टेक्नोलॉजी और फेडएक्स जैसी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे भी अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट सेक्टर की स्थिति का संकेत देंगे.

ऑस्ट्रेलिया में महंगाई और रोजगार पर फोकस

ऑस्ट्रेलिया इस सप्ताह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और रोजगार संबंधी आंकड़े जारी करेगा. हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने ब्याज दरों को 4.35 फीसदी पर बरकरार रखा था, लेकिन भविष्य में दरें बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं.यदि महंगाई में कमी और रोजगार बाजार में कमजोरी के संकेत मिलते हैं तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदल सकती हैं.

कोलंबिया चुनाव का बाजार पर असर

कोलंबिया में राष्ट्रपति चुनाव का रनऑफ मतदान होने जा रहा है. चुनाव परिणाम देश की आर्थिक नीतियों और निवेश माहौल को प्रभावित कर सकता है.

बाजार समर्थक माने जाने वाले उम्मीदवार एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला की जीत को निवेशक सकारात्मक मान रहे हैं, जबकि वामपंथी उम्मीदवार इवान सेपेदा की नीतियों को लेकर निवेशकों में कुछ आशंकाएं हैं.

लंदन क्लाइमेट वीक में ऊर्जा और निवेश पर चर्चा

लंदन में आयोजित होने वाले क्लाइमेट वीक में दुनिया भर के नीति निर्माता, निवेशक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. सम्मेलन में स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु वित्तपोषण और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि भूराजनीतिक तनाव, महंगाई और जलवायु से जुड़े मुद्दों के बीच आने वाला सप्ताह वैश्विक बाजारों के लिए दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है.

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